हिंदुस्तान यूनिलीवर के साबुन, शैम्पू और डिटर्जेंट महंगे हो सकते हैं; कीमतें कितनी और कब से बढ़ेंगी

Hindustan Unilever Price Update: हिंदुस्तान यूनिलीवर के साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट या रोज़मर्रा के इस्तेमाल की दूसरी चीज़ें खरीदने वाले ग्राहकों के लिए एक ज़रूरी खबर है। देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने संकेत दिया है कि अगर महंगाई का दबाव बना रहता है, तो सितंबर तिमाही में कई उत्पादों की कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। हालांकि, कंपनी ने साफ़ किया है कि कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी सोच-समझकर और सिर्फ़ ज़रूरत पड़ने पर ही की जाएगी, ताकि बिक्री पर ज़्यादा असर न पड़े।

तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद CEO और MD प्रिया नायर ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में सितंबर तिमाही में महंगाई 2% से 5% तक बढ़ने की संभावना है।

नतीजतन कंपनी ज़रूरतों के आधार पर कई उत्पादों की कीमतों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी करने का फ़ैसला कर सकती है। हिंदुस्तान यूनिलीवर ने पहले ही वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान अपने कई उत्पादों की कीमतों में 2% से 5% की बढ़ोतरी की थी। कंपनी ने साफ़ किया कि अगर कच्चे माल की लागत का दबाव बना रहता है, तो वह सितंबर तिमाही में भी “कैलिब्रेटेड प्राइसिंग” यानी सीमित और ज़रूरत-आधारित मूल्य वृद्धि का सहारा लेगी।

हिंदुस्तान यूनिलीवर के CFO निरंजन गुप्ता के अनुसार, कंपनी ने जून तिमाही के दौरान कीमतों में बदलाव करके बढ़ती लागत का सिर्फ़ आधा बोझ ग्राहकों पर डाला। इसके बावजूद, कंपनी अपना EBITDA मार्जिन 23% पर बनाए रखने में कामयाब रही। उन्होंने कहा कि कंपनी लागत कम करने पर ध्यान देते हुए बहुत संतुलित तरीके से कीमतों में बदलाव करना जारी रखेगी।

कंपनी के अनुसार, साबुन के कारोबार पर लगातार दो साल से कच्चे माल की महंगाई का सबसे ज़्यादा असर पड़ा है। इस वजह से कई ग्राहक छोटे और कम कीमत वाले पैक की ओर रुख कर रहे हैं। डव और पियर्स जैसे प्रीमियम साबुन की मांग डबल-डिजिट दर से बढ़ रही है। लाइफबॉय ब्रांड को फिर से मज़बूत करने की कोशिशें भी चल रही हैं। प्रिया नायर ने कहा कि हिंदुस्तान यूनिलीवर बॉडी वॉश कैटेगरी में मार्केट लीडर है। चूंकि भारत में इस उत्पाद की पहुंच अभी कम है, इसलिए भविष्य में इस कैटेगरी में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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हाल के दिनों में, ग्रामीण और शहरी बाज़ारों में मांग का स्तर एक जैसा हो गया है। दोपहिया वाहनों और ट्रैक्टरों की बढ़ती बिक्री ग्रामीण इलाकों में मज़बूत होती मांग का संकेत देती है। हालांकि, हिंदुस्तान यूनिलीवर मॉनसून और अल नीनो के संभावित असर पर नज़र बनाए हुए है।

रेवेन्यू में बढ़ोतरी, फिर भी मुनाफ़े में गिरावट

कच्चे तेल, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत ने पूरे FMCG सेक्टर पर दबाव डाला है। अप्रैल-जून तिमाही में, हिंदुस्तान यूनिलीवर का रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 10% बढ़कर ₹17,341 करोड़ हो गया। हालांकि, इसी दौरान कंपनी का नेट प्रॉफ़िट 3.2% घटकर ₹2,680 करोड़ रह गया। लागत बढ़ने की वजह से मुनाफ़े में गिरावट आई है, लेकिन हिंदुस्तान यूनिलीवर ने साफ़ किया है कि वह बिज़नेस की ग्रोथ और ग्राहकों की मांग बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान दे रही है।

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