शुकदेव जन्म,भागवत महिमा से गूंजा चिंताहरण धाम
कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब

जसवंतनगर,इटावा बलरई स्थित प्रसिद्ध चिंताहरण धाम कारसदेव खाटूश्याम मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा,भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कथा का दिव्य वातावरण बना रहा। श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथाव्यास पूज्य निशांत कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना तथा परम ज्ञानी शुकदेव जी महाराज के दिव्य जन्म की कथा सुनाते हुए उसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा परिसर हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय हो उठा।
कथाव्यास ने बताया कि महर्षि वेदव्यास ने चारों वेद,महाभारत और अठारह पुराणों की रचना के बाद भी आत्मिक शांति का अनुभव नहीं किया। तब देवर्षि नारद के उपदेश पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की निष्काम भक्ति और दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की, जिसे कलियुग में मोक्ष प्रदान करने वाला सर्वोत्तम ग्रंथ माना गया है।
उन्होंने शुकदेव जी महाराज के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास के पुत्र शुकदेव गर्भ में ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर चुके थे। माया के बंधन से बचने के लिए वे 12 वर्षों तक माता के गर्भ में रहे। भगवान श्रीकृष्ण के आश्वासन के बाद उन्होंने जन्म लिया और जन्म लेते ही वैराग्य धारण कर वन की ओर प्रस्थान कर गए। आगे चलकर उन्हीं शुकदेव जी महाराज ने मृत्यु से पूर्व सात दिनों में राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत महापुराण का अमृतमय श्रवण कराया,जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
कथा में राजा परीक्षित की भूमिका मंदिर के महंत सुनील महाराज एवं उनकी धर्मपत्नी सोनी देवी निभा रहे हैं,जबकि यज्ञपति के रूप में सुरेश डीलर एवं उनकी धर्मपत्नी सीता देवी विराजमान हैं। कथाव्यास निशांत कृष्ण जी महाराज आगामी दिनों में श्रीमद्भागवत की विभिन्न लीलाओं और प्रसंगों का रसपान कराएंगे। प्रतिदिन कथा के उपरांत भव्य भजन-कीर्तन,आरती और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जा रहा है।
आयोजन को लेकर चिंताहरण धाम कारसदेव खाटूश्याम मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों,विद्युत झालरों और आकर्षक रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।



