तपती गर्मी में नवजात शिशु रोए तो क्या उसे पानी पिलाना चाहिए, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

New Parents Tips: तेज गर्मी की शुरुआत होते ही नवजात बच्चों के माता-पिता की चिंताएं अचानक बढ़ जाती हैं। चिलचिलाती धूप और उमस के बीच जब छोटा बच्चा बार-बार रोता है, तो अक्सर पैरेंट्स के मन में पहला ख्याल यही आता है कि शायद बच्चे को प्यास लगी है। कई लोग तो बिना सोचे-समझे शिशु को चम्मच से पानी पिलाना भी शुरू कर देते हैं। अगर आप भी ऐसा ही कुछ सोच रहे हैं, तो रुकिए! क्योंकि आपकी यह छोटी सी कोशिश आपके लाडले की सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। शिशुओं को पानी देने को लेकर एक्सपर्ट्स की राय बेहद चौंकाने वाली है।
रोते हुए बच्चे को पानी पिलाना कितना सही?
अक्सर देखा जाता है कि बच्चा जैसे ही रोना शुरू करता है, घर के बड़े-बुजुर्ग उसे पानी देने की सलाह देने लगते हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिष कुलकर्णी के मुताबिक, रोते हुए हर बच्चे का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि वह प्यासा है। छोटे बच्चे अपनी हर तकलीफ को रोकर ही बयां करते हैं। उनके रोने की वजह भूख, अधूरी नींद, शरीर में गर्मी लगना, डायपर का गीला होना या सिर्फ मां की गोद में आने की चाहत भी हो सकती है। इसलिए सिर्फ रोने को प्यास का संकेत मानकर बच्चे के मुंह में पानी डालना पूरी तरह गलत है।
शुरुआती 6 महीने सिर्फ दूध ही क्यों है जरूरी?
मेडिकल साइंस और डॉक्टरों के अनुसार, जन्म से लेकर छह महीने तक के शिशु के लिए मां का दूध या फॉर्मूला मिल्क ही संपूर्ण आहार होता है। इस उम्र में बच्चे का पेट बहुत छोटा होता है और वह पूरे दिन में लगभग 600 मिलीलीटर से लेकर 1 लीटर तक दूध पीता है। अगर आप इस छोटे से पेट को पानी से भर देंगे, तो बच्चे की भूख मर जाएगी और वह पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं पिएगा। दूध कम पीने की वजह से शिशु के शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाएंगे, जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
क्या पानी पीने से नवजात शिशु बीमार हो सकता है?
ज्यादातर लोगों को लगता है कि पानी तो जीवन है, इससे भला क्या नुकसान होगा? लेकिन 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के मामले में यह धारणा बिल्कुल उल्टी बैठती है। इस उम्र में शिशुओं के गुर्दे यानी किडनी पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं। ऐसे में अगर उन्हें ऊपर से पानी दिया जाए, तो उनकी किडनी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे बच्चे के शरीर में सोडियम का स्तर असंतुलित हो सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में ओरल वॉटर इंटॉक्सिकेशन कहा जाता है। यही कारण है कि डॉक्टर 6 महीने से पहले पानी की एक बूंद भी न देने की सख्त हिदायत देते हैं।
भीषण गर्मी में भी नहीं होती अलग से पानी की जरूरत
पैरेंट्स का सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि जब बड़ों को इतनी प्यास लगती है, तो क्या इस चिलचिलाती गर्मी में भी बच्चे को पानी न दें? डॉक्टर इसका जवाब साफ शब्दों में ‘ना’ देते हैं। असल में मां के दूध और फॉर्मूला मिल्क में लगभग 85% हिस्सा पानी का ही होता है। जब बच्चा अपनी भूख मिटाने के लिए दूध पीता है, तो उसके शरीर में पानी की कमी अपने आप पूरी हो जाती है। इसलिए चाहे कितनी भी भीषण गर्मी क्यों न हो, बच्चे को अलग से पानी पिलाने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
जानिए किस उम्र में कितनी मात्रा में शुरू करें पानी
जब आपका बच्चा 6 महीने का हो जाए और वह ठोस आहार (Solid Food) लेना शुरू कर दे, तब आप उसे धीरे-धीरे पानी पिलाना शुरू कर सकते हैं। डॉक्टर इसके लिए एक सही चार्ट फॉलो करने की सलाह देते हैं:
6 से 9 महीने की उम्र: इस दौरान बच्चे को कुछ भी ठोस खिलाने के बाद चम्मच से लगभग 30 मिलीलीटर पानी दें। पूरे दिन में 100 से 150 मिलीलीटर पानी उनके लिए काफी होता है।
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9 से 12 महीने की उम्र: जैसे-जैसे बच्चा बड़ा हो, आप उसे हर बार ठोस आहार देने के बाद लगभग 60 मिलीलीटर पानी दे सकते हैं। इस उम्र के बच्चों के लिए दिनभर में 200 से 250 मिलीलीटर पानी पर्याप्त माना जाता है।



