एम. ए. संस्कृत के विद्यार्थियों ने नैमिषारण्य का शैक्षिक भ्रमण किया

सुलतानपुर। राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज,संस्कृत विभाग द्वारा एक दिवसीय शैक्षिक भ्रमण का आयोजन एम. ए. द्वितीय सेमेस्टर के लिये किया गया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ.यशमंत सिंह के निर्देशन में विद्यार्थियों का दल उत्तर प्रदेश के पवित्र तीर्थ स्थल नैमिषारण्य (नीमसार ) के लिए प्रस्थान किया।

नैमिषारण्य, जो कि गोमती नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन एवं आध्यात्मिक स्थल है, भारतीय संस्कृति और धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मान्यता के अनुसार सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने ऋषियों को ध्यान हेतु सुरक्षित स्थान प्रदान करने के लिए अपना चक्र पृथ्वी पर फेंका था, जो नैमिषारण्य में आकर गिरा। इसी कारण यह स्थान चक्रतीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यहाँ स्थित चक्राकार जलधारा में श्रद्धालु स्नान एवं परिक्रमा कर चारों युगों का प्रतीकात्मक दर्शन करते हैं।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने चक्रतीर्थ के समीप स्थित माँ ललिता देवी मंदिर के दर्शन किए, जिसे हिंदुओं के प्रमुख शक्तिपीठों में एक माना जाता है।मान्यता है कि यहाँ सती का हृदय गिरा था। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने व्यास गद्दी एवं यज्ञशाला का भी अवलोकन किया, जहाँ महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन, महाभारत एवं अठारह पुराणों की रचना की थी।

इसी स्थान पर उन्होंने अपने शिष्यों जैमिनी, सुमंतु, पैल और वैशम्पायन को वेद-पुराणों का ज्ञान प्रदान किया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को यह भी जानकारी दी गई कि नैमिषारण्य से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित दधीचि कुंड वह पवित्र स्थान है, जहाँ महर्षि दधीचि ने देवताओं एवं मानव जाति की रक्षा हेतु अपनी अस्थियाँ इंद्र को दान कर दी थीं, जिनसे बने वज्र से वृत्रासुर का वध किया गया। यह स्थल त्याग, समर्पण और निस्वार्थता का अद्भुत प्रतीक है।

विद्यार्थियों ने इस शैक्षिक भ्रमण के माध्यम से भारतीय धार्मिक परंपराओं, पुराणों और सांस्कृतिक धरोहरों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। छात्रा अंशिका पाण्डेय एवं अंशिका सक्सेना सहित अन्य विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया।

इस भ्रमण में डॉ नीतू सिंह, डॉ बीना सिंह, अंशिका पाण्डेय, अंशिका सक्सेना, आदित्य, सचिन, काजल, मंजुला, प्रतिभा, शिवा, आस्था सहित कुल 30 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं स्मरणीय सिद्ध हुआ।

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