अब बूंद-बूंद को तरसेगा PAK, भारत ने नदियों पर कसा ऐसा शिकंजा कि इस्लामाबाद में मचा हड़कंप

chenab river water: भारत द्वारा अपनी जल प्रबंधन परियोजनाओं को लेकर उठाए गए हालिया कदमों से पाकिस्तान में चिंताओं का माहौल बन गया है। खासकर झेलम और चिनाब नदियों के जल प्रवाह को नियंत्रित करने के भारत के प्रयासों से पाकिस्तान की सरकार बेहद परेशान है। पाकिस्तान के जल विभाग के अफसरों का मानना है कि भारत द्वारा इन नदियों पर चल रहे प्रोजेक्ट्स के बाद जल संकट और सूखा एक बड़ा खतरा बन सकता है।

भारत के प्रोजेक्ट्स से पाकिस्तान में असमंजस

भारत की तरफ से इन नदियों पर नए बांध बनाने और जल संग्रहण के लिए किए जा रहे प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 60 अरब डॉलर के करीब बताई जा रही है। पाकिस्तान के अफसरों का कहना है कि इस निवेश के बाद, इन नदियों में पानी को रोकने की क्षमता 15 दिनों से बढ़कर 60 दिनों तक हो जाएगी। इसके परिणामस्वरूप, पाकिस्तान में पानी की भारी कमी हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जो कृषि पर निर्भर हैं।

सूखा और बाढ़ की नई आशंका

पाकिस्तान में जल प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंता बढ़ी है, क्योंकि इसे दोनों तरह की आपदाओं का डर सता रहा है: सूखा और बाढ़। अफसरों का कहना है कि फसलों की सिंचाई के लिए आवश्यक पानी उपलब्ध नहीं होगा, वहीं मॉनसून के मौसम में भारत अधिक पानी छोड़ सकता है, जिससे पाकिस्तान के कुछ बड़े क्षेत्र जलमग्न हो सकते हैं। इस स्थिति को लेकर पाकिस्तान ने भारत से जवाब भी मांगा है और जल सुरक्षा को लेकर रणनीतिक कदम उठाने की बात की है।

भारत का चालाकी से जल प्रबंधन

भारत ने अपनी नदियों का पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की शुरुआत की है, जैसे कि शहपुर कंडी डैम, जो रावी नदी का पानी रोकने के उद्देश्य से बनाए जा रहे हैं। इससे न केवल पाकिस्तान के लिए जल संकट और अधिक गंभीर हो सकता है, बल्कि भारत के जम्मू और कश्मीर के क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

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पाकिस्तान की बढ़ती चिंता और प्रतिक्रियाएं

पाकिस्तान के जल मंत्रालय और सरकारी अधिकारी अब भारत के जल प्रबंधन पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। वे भारत द्वारा बनाए जा रहे इन नए बांधों और जल परियोजनाओं को लेकर लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं। सिंधु जल समझौते के तहत भारत का रुख पाकिस्तान के लिए चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि इससे पाकिस्तान को होने वाली जल आपूर्ति में कमी का खतरा बढ़ गया है।

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