सांसदों के लिए आ रहा नया नियम, काम ना करने पर कटेगा वेतन
संसद की कार्रवाई में सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नई शुरुआत की तैयारी प्रशंसनीय कदम है। लोकसभा सचिवालय का यह प्रयास ‘देर आए, दुरुस्त आए’ कहा जाएगा। सदन के बाहर शक्ल दिखाकर चले जाने से अब काम नहीं चलेगा। संसद में बजट सत्र से हाजिरी सिस्टम बदल जाएगा। नए नियम का पालन न करने पर माननीयों को वेतन-भत्ते से हाथ धोना पड़ेगा। पुरानी व्यवस्था के तहत सदन के बाहर हाजिरी रजिस्टर रखा रहता है। आमतौर पर कुछ सांसद रजिस्टर में हस्ताक्षर कर लौट जाते हैं। वह सदन की कार्रवाई में भाग लेने से परहेज करते हैं।
नया नियम लागू होने पर हाजिरी सदन के बाहर नहीं बल्कि भीतर लगाई जाएगी। प्रत्येक सांसद की हाजिरी सदन में सीट पर बैठने के बाद डिजिटल तरीके से लग सकेगी। किसी कारण से सदन के स्थगित होने के बाद कोई सांसद वहां आता है तब भी उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा। ऐसे में संबंधित दिवस के वेतन-भत्ते का लाभ नहीं मिल पाएगा। संसद को लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। जहां देश के विकास और भविष्य की योजनाओं को आकार देने का काम होता है। संसद के दोनों सदनों में अक्सर सदस्यों की शत-प्रतिशत उपस्थिति नहीं रहती।
Ram Mandir Anniversary 2026: लागत 1800 करोड़, दान 3000 करोड़; जानें कितने लोगों ने किए अब तक दर्शन
कई सदस्य आमतौर पर औपचारिकता निभाने के लिए वहां आते हैं, मगर उन्हें वेतन-भत्ते का भरपूर लाभ मिल जाता है। इस परिपाटी को समाप्त करने के मकसद से लोकसभा सचिवालय का नया फैसला नेक पहल है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस नई व्यवस्था की जानकारी दे चुके हैं। संसद में जब भी चर्चा होती है तो एक मिनट का खर्च आम आदमी की पूरे साल भर की कमाई के बराबर होता है। वहां एक मिनट के लिए ढाई लाख रुपए खर्च होते हैं। यानी एक घंटे में डेढ़ करोड़ से अधिक का खर्च आता है। ये आंकड़ा लगभग तेरह साल पुराना है।
वर्तमान में यह खर्च कई गुना ज्यादा हो सकता है। इसमें लाइव टेलीकास्ट, एयर कंडीशनिंग और कर्मचारियों का पूरा खर्च शामिल है। इस दौरान कई अतिरिक्त कर्मचारी भी लगाए जाते हैं। इसके अलावा सांसदों को आने-जाने और बाकी भत्ते भी दिए जाते हैं। प्रत्येक सांसद की सैलरी करीब सवा लाख रुपए प्रतिमाह है। पहले उन्हें एक लाख रुपए प्रतिमाह मिलते थे। इसके अतिरिक्त डेली अलाउंस ढाई हजार रुपए है। पूर्व सांसद की पेंशन तीस हजार रुपए प्रतिमाह से अधिक है। लोकसभा में वर्तमान में 543 सदस्य तथा राज्यसभा में ढाई सौ सदस्य हैं।
साल में कितनी फ्री हवाई यात्राएं कर सकता है सांसद
प्रत्येक सांसद एक साल में 34 फ्री हवाई यात्राएं कर सकता है। सांसद चाहे तो आठ यात्राओं को अपने सहयोगियों या स्टाफ को ट्रांसफर कर सकते हैं। उन्हें भारतीय रेलवे की सभी क्लास में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है। यह सुविधा संसद सत्र के दौरान और बाद भी मिलती है। इसके अतिरिक्त भी सांसदों को अन्य सुविधाएं मिल रही हैं।
इसके बावजूद वह यदि सदन की कार्रवाई से हिस्सा लेने से परहेज करते हैं तो यह उचित नहीं है। देश में सरकारी और निजी सेक्टर में अधिकारियों व कर्मचारियों को काम के बदले वेतन मिलता है। बेहतर काम के आधार पर उन्हें प्रमोशन का लाभ दिया जाता है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रत्येक कार्यदिवस में ऑफिस आकर उपस्थिति दर्ज करानी होती है। पद चाहे छोटा हो या बड़ा, नियम सभी के लिए बराबर है। फिर सांसदों को बगैर काम के वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधाएं क्यों मिलनी चाहिए?



