रात भर में पत्थर बन गए थे 1 करोड़ देवता, आज भी रहस्यों से भरा हुआ है ये भारतीय मंदिर

Mysterious Indian Temple: एक मंदिर रहस्यमयी मूर्तियों और लोककथाओं से जुड़ा हुआ है। जानिए इस मंदिर के बारे में दिलचस्प तथ्यों और अंधविश्वासों को, जो आज भी श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं को आकर्षित करते हैं।

Mysterious Indian Temple: भारत में कई जगहों पर रहस्यमयी पुराने मंदिर, मिथक और कई तरह की मान्यताएं और अंधविश्वास देखने को मिलते हैं। ऐसी ही रहस्यमयी और दिलचस्प धार्मिक जगहों में से एक है त्रिपुरा का मशहूर उनाकोटी मंदिर। दावा किया जाता है कि यहां 99 लाख 99 हज़ार 999 पत्थर की मूर्तियां हैं। खास बात ये है कि यह संख्या 1 करोड़ से ठीक एक कम क्यों है? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।

उनाकोटी मंदिर में मूर्तियों के बारे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में मूर्तियां किसने, कब और कैसे बनाईं? इतिहासकारों, रिसर्चर्स और आर्कियोलॉजिस्ट्स ने इस रहस्य को जानने की कोशिश की है, मगर आज तक कोई ठोस ऐतिहासिक सबूत नहीं मिला है। यहां पहाड़ियों पर देवी-देवताओं, जानवरों और पक्षियों और पौराणिक आकृतियों की शानदार मूर्तियां बनी हुई हैं। ‘अधूरी’ संख्या 99,99,999 इस मंदिर के रहस्य को और बढ़ाती है और भक्तों और विद्वानों को समान रूप से आकर्षित करती है।

लोककथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव एक करोड़ देवी-देवताओं के साथ यात्रा पर निकले। यात्रा के दौरान, सभी देवता थक गए और एक जगह सो गए। जब ​​शिव सुबह उठे, तो देवताओं को अभी भी सोया हुआ देखकर, वे क्रोधित हो गए और उन्हें पत्थर में बदल जाने का श्राप दे दिया। यानी, ऐसा माना जाता है कि वे पत्थर की मूर्तियाँ स्वयं देवताओं के पत्थर के रूप हैं। मान्यता के अनुसार, एक देवता के उद्धार के कारण संख्या एक करोड़ के बजाय एक कम हो गई थी। यह कहानी आज भी भक्तों के बीच सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है।

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एक और लोकप्रिय कहानी कालू नाम के एक कुशल मूर्तिकार से जुड़ी है। इस कहानी के अनुसार, कालू शिल्पकार भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत जाना चाहता था। भगवान शिव ने उसके सामने एक शर्त रखी कि अगर वह एक रात में देवी-देवताओं की एक करोड़ मूर्तियाँ बना सकता है, तो उसे कैलाश ले जाया जाएगा। कालू ने पूरी रात मेहनत की, मगर सुबह तक एक मूर्ति गायब थी। शर्त पूरी न होने पर भगवान शिव उसे कैलाश नहीं ले गए। माना जाता है कि इसी घटना से इस जगह का नाम ‘उनाकोटि’ (एक करोड़ में से एक कम) पड़ा।

कहां है ये मंदिर

मंदिर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से करीब 145 किलोमीटर दूर है। प्राकृतिक पहाड़ों में बसा यह स्थान न सिर्फ धार्मिक तौर पर बल्कि सांस्कृतिक और टूरिस्ट के तौर पर भी बहुत अहम माना जाता है। उनाकोटि मंदिर सिर्फ एक धार्मिक जगह ही नहीं है बल्कि भारतीय लोककथाओं, आस्था और मूर्तिकला का जीता-जागता प्रतीक भी है।

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