इन दो देशों में 900 साल पुराने शिव मंदिर के लिए युद्ध, PM को छोड़नी पड़ी कुर्सी

preah vihear temple dispute: दुनिया के दो देश जो कुदरती खूबसूरती से भरे हुए हैं, उनके बीच एक शिव मंदिर को लेकर बड़ा झगड़ा हो गया है। यह झगड़ा इतना बढ़ गया है कि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर जंग का ऐलान कर दिया है। दोनों देशों के बीच बॉर्डर विवाद एक बार फिर सिर उठा चुका है।
कंबोडिया व थाईलैंड के बॉर्डर पर जंग जैसे हालात बन गए हैं। कंबोडिया ने एक थाई सैनिक को मार गिराया, जबकि थाईलैंड ने कंबोडिया पर एयर स्ट्राइक की। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीजफायर करवाया था। हालांकि, यह सिर्फ 45 दिनों में ही टूट गया है।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सिर्फ बॉर्डर विवाद ही नहीं है, बल्कि इसके साथ ही दोनों देश 900 साल पुराने शिव मंदिर को लेकर भी भिड़ते दिख रहे हैं। डांगरेक पहाड़ की चोटी पर बना प्राचीन प्रेह विहार मंदिर अब सिर्फ एक धार्मिक जगह नहीं रहा, बल्कि यह अब थाईलैंड और कंबोडिया के बीच बॉर्डर विवाद का सेंटर बन गया है।
प्राचीन शिव मंदिर मगर विवाद की वजह
यह 11वीं सदी का खूबसूरत हिंदू मंदिर UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। मगर आस-पास की ज़मीन पर बार-बार मिलिट्री झड़पें होती रही हैं। इलाके के हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं और मामले इंटरनेशनल कोर्ट में चले गए हैं। हाल के महीनों में थाई आर्मी ने 100 से ज़्यादा कंबोडियाई सैनिकों को मारने का दावा किया है। इस बीच कंबोडिया ने 21 सैनिकों के मारे जाने, 50 आम लोगों के घायल होने और 300,000 से ज़्यादा लोगों के बेघर होने की खबर दी है।
मंदिर को लेकर झगड़ा क्यों है?
दोनों देशों के बीच झगड़ा (Thailand Cambodia Border Clash) 1907 से चल रहा है। फ्रांस के राज मेंफ्रांस ने एक मैप बनाया था जिसमें प्रीह विहार मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा दिखाया गया था। उस समय थाईलैंड ने मैप पर कोई एतराज़ नहीं जताया था। मगर दशकों बाद यह फ़ैसला दोनों देशों के लिए एक समस्या बन गया। थाईलैंड अब यह दलील दे रहा है कि 1907 का फ्रेंच मैप 1904 की उस ट्रीटी को नज़रअंदाज़ करता है जिसमें कहा गया था कि बॉर्डर डांगरेक पहाड़ों के नेचुरल वॉटरशेड के साथ खींचा जाना चाहिए। थाई अधिकारियों के मुताबिक, अगर वॉटरशेड को ध्यान में रखा जाए, तो मंदिर थाई इलाके में आता है। दोनों देश अब मंदिर को अपनी सीमा में मानते हैं।
ICJ ने कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाया!
1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाया और मंदिर पर उसके अधिकार को मान्यता दी। थाईलैंड को अपने सैनिकों को वापस बुलाने और उस जगह से ली गई कोई भी कलाकृति वापस करने का आदेश दिया गया। इस फैसले से थाईलैंड नाराज़ हो गया और तब से दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक तनाव की वजह बना हुआ है। हालांकि, कोर्ट के फैसले से एक बड़ा सवाल बिना जवाब के रह गया: मंदिर के आसपास के 4.6 वर्ग किलोमीटर इलाके का मालिक कौन है?
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2008 में यह विवाद फिर से बढ़ गया
2008 में यह विवाद (thailand conflict with cambodia) फिर से बढ़ गया जब कंबोडिया ने प्रीह विहार मंदिर को UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट के तौर पर रजिस्टर किया। थाईलैंड ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया, क्योंकि उसे डर था कि इससे मंदिर के आसपास के इलाके पर कंबोडिया का कंट्रोल सही हो जाएगा। इसके बाद 2008 और 2011 के बीच थाई और कंबोडियाई सैनिकों के बीच कई हिंसक झड़पें हुईं। लड़ाई में मोर्टार और रॉकेट से हमला हुआ, जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए और हज़ारों लोग बेघर हो गए।
इस विवाद के बाद कंबोडिया ने 2011 में फिर से इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का दरवाज़ा खटखटाया, और 1962 के फ़ैसले पर सफ़ाई मांगी। 2013 में, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने फिर से माना कि मंदिर कंबोडिया का है और थाईलैंड को उस इलाके से अपने सैनिक हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिर के आस-पास का इलाका भी कंबोडिया की आज़ादी के अंदर आता है। हालाँकि, थाईलैंड ने भविष्य के झगड़ों में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के और दखल को यह कहते हुए मना कर दिया है कि बाकी सभी बॉर्डर के मसले आपसी बातचीत से सुलझा लिए जाएँगे।
दोनों देशों के लिए मंदिर इतने ज़रूरी क्यों
वहीं कंबोडिया के लोगों के लिए प्रीह विहिर मंदिर खमेर विरासत और कल्चरल गर्व की निशानी है। इसे देश के इतिहास में सबसे आध्यात्मिक रूप से अहम इमारतों में से एक माना जाता है। यह मंदिर उनकी पुरानी संस्कृति का सबूत है। हालाँकि, थाईलैंड के लिए यह झगड़ा सिर्फ़ ज़मीन का नहीं है। नेशनलिस्ट ग्रुप इस इलाके को छोड़ा हुआ इलाका मानते हैं।
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विवाद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गया
थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर का झगड़ा इतना बढ़ गया है कि थाई प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा। पिछले महीने, थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर विवाद के दौरान, थाई प्रधानमंत्री पटोंगटार्न शिनावात्रा और कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन के बीच 17 मिनट की फ़ोन कॉल लीक हो गई थी।
लीक हुई कॉल में पटोंगटार्न ने हुन सेन को “अंकल” कहा और कुछ थाई मिलिट्री कमांडरों को गुस्सैल कहा। इससे थाईलैंड में कड़ी प्रतिक्रिया हुई। बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और मिलिट्री और राजशाही के समर्थक ग्रुप नाराज़ हो गए। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी, भुमजैथाई पार्टी, गठबंधन से हट गई, जिससे सरकार अल्पमत में आ गई। मिलिट्री ने भी इसे देश के सम्मान का अपमान माना, जिससे राजनीतिक दबाव बढ़ गया। नतीजतन, पटोंगटार्न को 29 अगस्त को पद से हटा दिया गया।



