काजू, बादाम, पिस्ता और शेरनी बाई; वोटर लिस्ट देखकर अधिकारी भी हैरान, अजीब नामों के पीछे क्या वजह

‘काजू सिंह’, ‘बादाम’, ‘पिस्ता’, ‘शेरनी बाई’, ‘टीवी’, ‘एंटीना’, ‘धर्मेंद्र’, ‘राजेश खन्ना’, ‘दिलीप कुमार’, ‘हेमा मालिनी’… नामों की ये वोटर लिस्ट पढ़कर आप हैरान हो गए होंगे, लेकिन ये कोई मज़ेदार कहानी नहीं है, ये अनोखे नाम मध्य प्रदेश के आगर मालवा ज़िले में SIR के तहत अपडेट हो रही वोटर लिस्ट में मिले हैं, जिससे वोटर लिस्ट चेक करने वाले अधिकारी भी हैरान हो गए हैं।

आगर मालवा ज़िले के दो पोलिंग स्टेशन 93 और 94 इन अजीब और कमाल के नामों की वजह से आजकल चर्चा में हैं। इन स्टेशनों पर वोटर्स के नाम फ़िल्म के पोस्टर, हीरो-हीरोइन, ड्राई फ्रूट्स या टूरिज़्म ब्रोशर पर लिखे नामों जैसे हैं। इन अजीब नामों ने सबका ध्यान खींचा है। लेकिन, इस अनोखे नामकरण के पीछे की असली वजह जानना भी उतना ही दिलचस्प है।

नामों के पीछे ‘पाढ़ी’ समुदाय की ज़िंदगी की कहानी

वोटर लिस्ट में ये अनोखे नाम यहां के पारधी समुदाय के लाइफस्टाइल से जुड़े हैं। यह समुदाय पीढ़ियों से खानाबदोश ज़िंदगी जी रहा है। उनकी खानाबदोश लाइफस्टाइल उनके बच्चों के नाम रखने के तरीके को भी अनोखा बनाती है।

जब कोई बच्चा पैदा होता है, तो वे उस समय अपने आस-पास मौजूद चीज़ या चीज़ के आधार पर अपने बच्चे का नाम रखते हैं। कभी टेंट में सेट की गई फ़िल्म के हीरो-हीरोइन का नाम, कभी जिस शहर में वे जा रहे हैं उसका नाम, तो कभी परिवार में खाए जाने वाले स्नैक्स का नाम बच्चे को दिया जाता है।

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2006 से BLO के तौर पर काम कर रहे संतोष जायसवाल अपना अनुभव शेयर करते हुए हंसते हुए कहते हैं, “माधुरी दीक्षित, जीतेंद्र दीक्षित, प्याज बाई, सारंगपुर बाई, हेमा मालिनी… शुरू में ये नाम बहुत अजीब लगते थे, लेकिन अब ये आदत बन गए हैं।”

संतोष जायसवाल ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा, “मैंने इतने फ़ॉर्म भरे हैं कि अब बॉलीवुड मुझे कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर हायर करेगा!” उनके दूसरे साथी BLO अफ़सरों को भी “काजू सिंह, सनी देओल, शेरनी बाई, शेर खान…” जैसे नाम पढ़कर लगा कि कोई मज़ाक कर रहा है; लेकिन आज ये नाम हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हैं।

नाम का राज़ बताया

आम लोगों को अनोखे लगने वाले नाम इन लोगों के लिए गर्व की बात और हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। ‘देश प्रेमी’ नाम के एक वोटर ने गर्व से अपने नाम के पीछे की कहानी बताई। जिस दिन मैं पैदा हुआ, मेरे पापा एक फ़िल्म देखने गए थे। उन्हें फ़िल्म में हीरो का नाम बहुत पसंद आया, कहानी पसंद आई और बस… उन्होंने मेरा नाम ‘देश प्रेमी’ रख दिया!

‘सोल्जर‘, ‘परदेसी’ और ‘राजकुमार’ जैसे नाम समाज में बहुत आम हैं। इनके नाम के साथ, वोटर लिस्ट में ये नाम सिर्फ़ नाम नहीं हैं, बल्कि इस खानाबदोश समुदाय की अनोखी ज़िंदगी और संस्कृति का सबूत हैं।

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