IPS Y Puran Kumar Case: आईपीएस पर जुल्म

IPS Y Puran Kumar Case: हरियाणा में सीनियर आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार सुसाइड केस ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। सरकार जहां सकते में है, वहीं पुलिस-प्रशासन में खलबली मची है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के अलावा दर्जन भर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी सवालों के घेरे में हैं। आरोप गंभीर होने की वजह से सरकार के मुखिया कोई कोताही बरतने की बजाए एक्शन मोड में हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम से यह मामला देशभर में चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों को सियासत करने का मौका न मिले, इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सख्त रुख अपनाना पड़ा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच आरंभ हो गई है। सर्विस सरकारी हो या प्राइवेट, पद बड़ा हो या छोटा, यदि लंबे समय तक उपेक्षा, मानसिक उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करना पड़े तो किसी का भी हौसला जवाब दे जाएगा।

क्यो परेशान थे IPS Y Puran Kumar

आमतौर पर इंसान धन-दौलत के नुकसान का तनाव झेल सकता है, मगर बात मान-सम्मान व स्वाभिमान पर चोट की हो तब दर्द असहनीय हो जाता है। ऐसी स्थिति में कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति न्याय न मिलने पर आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो जाता है। सुसाइड नोट से पता चला कि पूरन कुमार पिछले पांच साल से महकमे में प्रताड़ित होने के अलावा परिवार की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित थे। कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के सिंडिकेट द्वारा रचे गए चक्रव्यूह में वह इस कदर उलझ चुके थे कि मानसिक तनाव निरंतर बढ़ता रहा।

पूरन कुमार की पत्नी आईएएस हैं। जिनकी शिकायत पर सरकार को संज्ञान लेना पड़ा है। आईएएस और आईपीएस की नौकरी को बेहद सम्मान के नजरिए से देखा जाता है। इस सर्विस में दौलत, शौहरत व ताकत सब कुछ मिलता है। हालांकि आईएएस या आईपीएस बनना आसान नहीं है। प्रत्येक उम्मीदवार को यह मुकाम पाने से पहले रातों की नींद और दिन का चैन खोना पड़ता है। देश में आत्महत्या के मामले प्रतिदिन सामने आते हैं, मगर प्रताड़ना के कारण यदि कोई आईपीएस अधिकारी जान देने पर आमादा हो जाए तो यह गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।

पूरन कुमार सुसाइड केस: क्या प्रशासनिक लापरवाही बनी वजह?

प्रत्येक आईपीएस अधिकारी अपने सर्विस काल में योग्यता एवं वरीयता के आधार पर विभिन्न पदों का दायित्व संभालता है। वह समाज में शांति एवं सुरक्षा की भावना बनाए रखने के लिए दिन-रात प्रयास करता है। सवाल यह कि अगर कोई सीनियर अधिकारी लंबे समय तक उत्पीड़न और अपमान का शिकार होने से खुद को नहीं बचा पाता तो आमजन को भयमुक्त समाज व सुरक्षा देने के दावे कैसे पूरे हो पाएंगे?

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बता दें कि IPS Y Puran Kumar Case के लिए हरियाणा सरकार भी कम जिम्मेदार नहीं है। सरकार को पहले से मालूम था कि पुलिस विभाग में एक अधिकारी को परेशान किया जा रहा है। इसके बावजूद सरकार कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रही। पीड़ित पक्ष के आरोपों के मुताबिक जाति के आधार पर पूरन कुमार के साथ भेदभाव की नीति अपनाई गई। यह वाकई चिंताजनक तथ्य है।

यह घटना सभ्य एवं शिक्षित समाज की समझ पर भी सवाल खड़े करती है। हरियाणा सरकार को पूरे मामले की जांच कराकर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो। भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। तनाव हावी होने पर इससे बाहर निकलना आसान नहीं होता। सोचिए जब एक आईपीएस अधिकारी तनाव में आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर सकता है तो आम आदमी कैसे विषम परिस्थितियों का मुकाबला कर पाता होगा।

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