yogi police encounter: रिस्क’ मतलब यमलोक की सैर
गाजियाबाद में इनामी बदमाश बलराम ठाकुर का एनकाउंटर, रंगदारी मांगने पर पुलिस ने मुठभेड़ में किया ढेर। योगी राज में बढ़ा अपराधियों का खौफ, पुलिस एनकाउंटर से आम जनता को राहत।

yogi police encounter: योगी राज में पुलिस के सख्त रुख के बावजूद शातिर अपराधी ‘रिस्क’ लेने पर आमादा हैं। कोई संगीन अपराध करने पर अंजाम का पता है। फिर भी वह बाज आने को तैयार नहीं हैं। दिल्ली के नजदीक गाजियाबाद जिले में हाल-फिलहाल में पुलिस मुठभेड़ में तीन बदमाश ढेर हो चुके हैं। इसके बाद जरायम जगत में दहशत पैदा होना स्वाभाविक है।
रेस्टोरेंट मालिक ब्रह्मपाल यादव और लोहा कारोबारी अभिषेक गोयल से क्रमश: 50 लाख तथा 25 लाख रुपए की रंगदारी की डिमांड करने पर इनामी बदमाश बलराम ठाकुर को सीधे यमलोक की यात्रा करनी पड़ गई है। वह खुद को अनिल दुजाना का गुरु बताकर लंबे समय से जरायम जगत में सक्रिय था। बलराम का लंबा-चौड़ा आपराधिक इतिहास सामने आया है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में वह अपराधों को अंजाम देकर खौफ उत्पन्न कर रहा था।
बलराम मे yogi police के encounter से कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। इसके पहले ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र में पुलिस के साथ मुठभेड़ में दो बदमाश मारे गए थे। ढेर बदमाशों ने बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के बरेली आवास के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त करने के लिए पुलिस निरंतर प्रयासरत है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समय-समय पर अपराधियों को चेतावनी देते रहते हैं। ज्यादातर बदमाश भली-भांति समझ चुके हैं कि यूपी में संगीन अपराध करना खतरे से खाली नहीं है। जहां अपराध नियंत्रण के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति लागू हो, वहां कोई बड़ी वारदात कर आसानी से बच निकलना कतई संभव नहीं है। यूपी में योगी आदित्यनाथ आठ साल से सत्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अपराधियों को सबक सिखाने के उनके इरादे बिल्कुल साफ हैं। सीएम के प्रयासों से देश के सबसे बड़े राज्य में अपराधों के ग्राफ में लगातार कमी देखने को मिल रही है।
समय-समय पर कुख्यात अपराधियों का सफाया भी हो रहा है।
कानून व्यवस्था में सुधार आने और बदमाशों पर शिकंजा कसे जाने से न सिर्फ आमजन को राहत है बल्कि अर्थव्यवस्था में भी तेजी आई है। नए निवेशक अब यूपी में आने से नहीं कतरा रहे हैं। उन्हें मालूम है कि कारोबार के लिए अनुकूल माहौल बन चुका है। सपा और बसपा सरकारों के कार्यकाल में भी police encounter होते रहते थे, मगर तब अपराधी खौफ में नहीं आ पाते थे। किसी न किसी एनकाउंटर के बाद अक्सर विवाद खड़ा हो जाता था। पुलिस के खिलाफ माहौल बनने में देर नहीं लगती थी। इसके चलते पुलिस का मनोबल जवाब देने लगता था। वर्तमान में ऐसा नहीं है।
पुलिस यदि किसी बेकसूर पर अत्याचार करती है तो उसे भी दंड भुगतना पड़ता है। प्रदेशभर में छेड़छाड़, हत्या का प्रयास, मोबाइल व चेन झपटमारी, अपहरण, रंगदारी के लिए जान से मारने की धमकी जैसे मामलों में कमी आना इस बात की तस्दीक करता है कि योगी राज में अपराधियों को मनमानी करने की छूट नहीं है।
पुलिस के खौफ से बदमाश आज कांपते दिखाई देते हैं। जिन पर अपराध करने का पागलपन सवार होता है, वही अपराधी अब ‘रिस्क’ लेते हैं। जिन्हें अपनी जान प्यारी है, वे या तो जरायम जगत को अलविदा कर रहे हैं अथवा यूपी को छोड़कर भागने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। अपराधियों के परलोक पहुंचने की अनवरत प्रक्रिया आम जनता को पसंद आ रही है।



