धर्मगुरु और विवाद

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जाना-पहचाना नाम हैं। देश-विदेश में उनके असंख्य प्रशंसक हैं। दृष्टिहीन होने के बावजूद वह अपने अनुयायियों के जीवन में लंबे समय से ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए वह कानूनी जंग लड़ने में पीछे नहीं रहे थे। उनके एक बयान पर इन दिनों खासा विवाद देखने को मिल रहा है।
मेरठ के विक्टोरिया पार्क में आयोजित रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था कि भारत में हिंदू धर्म खतरे में है! पश्चिमी उत्तर प्रदेश मिनी पाकिस्तान प्रतीत होता है। उनके इस बयान पर सियासत गरम है। पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य साफगोई के लिए भी जाने जाते हैं। वह बगैर लाग-लपेट के सीधी बात कहते हैं। आलोचकों को वह अक्सर मुंहतोड़ जवाब देते हैं। सपा के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने जगद्गुरु के बयान की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि ऐसे बयान सिर्फ और सिर्फ समाज में भय, असुरक्षा और विभाजन फैलाने के लिए दिए जाते हैं, ताकि कुछ व्यक्तियों की राजनीतिक दुकान चलती रहे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी जगद्गुरु के बयान से सहमत नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि “योगी जी के राज में पाकिस्तान! ये कैसी बात है? योगी जी के राज में पाकिस्तान कैसे हो सकता है? और यदि रामभद्राचार्य जी कह रहे हैं तो मुझे बड़ा आश्चर्य हैं। सपा नेता शिवपाल यादव, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत व गायिका नेहा सिंह राठौर ने भी इस बयान पर असहमति जाहिर की है।
विवाद और विरोध होने के बाद भी जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने बयान पर कायम हैं।
उन्होंने संभल से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा भी उठाया है। पिछले कुछ समय से हिंदू धर्मगुरुओं के बयानों पर सियासी तनातनी हो रही है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के अलावा प्रेमानंद महाराज, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र शास्त्री, अनिरुद्धाचार्य महाराज आए दिन तीखे बयान देकर चर्चाओं में रहते हैं। रामभद्राचार्य और प्रेमानंद महाराज के बीच हाल ही में वार-पलटवार हो चुका है।
रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज की संस्कृत भाषा के ज्ञान पर सवाल उठाए थे।
वृंदावन निवासी अनिरुद्धाचार्य महाराज ने देश में लिव इन रिलेशनशिप की बढ़ती परंपरा पर नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि लिव इन में कुत्ते-बिल्ली रहते हैं, इंसान नहीं। इसके अतिरिक्त काफी समय पहले एक प्रख्यात कथावाचक के राधा रानी को लेकर दिए गए बयान पर खासा हंगामा बरपा था। बाद में कथावाचक को राधा रानी के भक्तों से माफी मांगनी पड़ी थी। योग गुरु स्वामी रामदेव भी पीछे नहीं हैं। उनके बयानों पर भी यदा-कदा विवाद उभर आते हैं।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य की समझ पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं। वह बेहद ज्ञानी संत हैं।
चित्रकूट में रहकर वह सालों से धर्म एवं मानवता की भलाई के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। यदि उन्होंने पउप्र की तुलना ‘मिनी पाकिस्तान’ पाकिस्तान से की है तो इसके पीछे के कारणों को भी समझने की आवश्यकता है। कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान को नफरत फैलाने वाला बताकर पलटवार किया है। अच्छा होगा कि इस विवाद को ज्यादा तूल न दिया जाए। चूंकि इससे शांति एवं कानून व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बढ़ेगा। वैसे सोशल मीडिया पर यह मामला नई बहस का कारण बन चुका है।



