जानें कौन है गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मालिक
Galgotias University CEO: गलगोटिया यूनिवर्सिटी के वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। जानें इस शिक्षा केंद्र का मालिक कौन है।
Galgotias University CEO: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसने गलगोटिया यूनिवर्सिटी की छवि को एक झटके में बदल कर रख दिया है। इस वीडियो को लेकर उठे विवाद ने पूरी शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने शिक्षा जगत में अपनी एक बड़ी पहचान बनाई है। वहीं दूसरी ओर अब ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये विश्वविद्यालय अपने दावों में सही था या ये सिर्फ एक प्रस्तुति का मामला था?
विवाद के पीछे की वजह
ये पूरा माजरा तब शुरू हुआ जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान एक रोबोटिक डॉग को लांच किया और उसे अपने इन-हाउस एआई इनोवेशन के रूप में पेश किया। दावा किया गया कि ये रोबोट यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बनाया गया है। मगर बाद में यह खुलासा हुआ कि यह रोबोट चीन की एक कंपनी द्वारा बनाया गया था और भारत में इसका बाज़ार मूल्य ₹2-3 लाख के आसपास है। इस खुलासे ने सोशल मीडिया पर भारी विवाद खड़ा कर दिया। खासकर चीन ने इस पर ट्वीट करके भारत का मजाक उड़ाया और बताया कि यह चीन का प्रोडक्ट है।
क्या गलगोटिया ने किया जानबूझकर दावा?
यह सवाल सबसे अधिक चर्चा का विषय बना। क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जानबूझकर एक विदेशी प्रोडक्ट को अपना इनोवेशन बताने का प्रयास किया, या यह सिर्फ एक गलती थी? यूनिवर्सिटी ने बाद में सफाई दी कि यह सिर्फ एक गलतफहमी थी और उनकी ओर से प्रस्तुति में कोई गलत उद्देश्य नहीं था। मगर तब तक मामला इतना बढ़ चुका था कि वीडियो वायरल हो चुका था और मीडिया में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।
कौन है यूनिवर्सिटी का मालिक
सुनील गलगोटिया का जीवन संघर्षों और सफलता की प्रेरक कहानी है। उनके परिवार ने 1930 के दशक में दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक छोटा सा बुक स्टोर खोला था। इसके बाद श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने 1980 के दशक में पब्लिशिंग सेक्टर में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 2000 में गलगोटिया इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की।
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इस कॉलेज की शुरुआत सिर्फ 40 छात्रों से हुई थी, मगर वक्त के साथ ये इंजीनियरिंग कॉलेज और बाद में एक पूरी यूनिवर्सिटी में बदल गया। 2011 में इसे उत्तर प्रदेश सरकार से विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ और अब ये हजारों छात्रों के लिए शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।



