दिवाली तक इन चीजों की कीमतें बढ़ना रुक जाएंगी, आम ग्राहकों को मिलने वाली है बड़ी राहत

FMCG product prices Diwali: त्योहारों के मौसम में रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल और प्रोडक्शन की लागत बढ़ गई है, फिर भी बड़ी FMCG कंपनियाँ तेल, साबुन, शैम्पू, नमक और टूथपेस्ट जैसे उत्पादों की कीमतें दिवाली तक स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, जिससे आम ग्राहकों को कुछ राहत मिल सकती है।
FMCG फूड सेक्टर के CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने कहा कि वे लागत प्रबंधन और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव के ज़रिए बढ़ती लागत के असर को कम कर रहे हैं। हालांकि, अगर लागत का दबाव बना रहता है, तो तीसरी या चौथी तिमाही में कुछ उत्पादों की कीमतों में बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
त्योहारों में मांग और प्रोडक्शन बढ़ने की उम्मीद
पारले प्रोडक्ट्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के अनुसार, आने वाले महीनों में शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में त्योहारों के दौरान मांग मज़बूत रहने की उम्मीद है।
नतीजतन, दिवाली से पहले FMCG उत्पादों की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है। इसके अलावा, मांग में संभावित बढ़ोतरी से प्रोडक्शन वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद है, जिससे महंगाई के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
इन चीज़ों की कीमतें स्थिर रहेंगी
खाने का तेल, साबुन, शैम्पू, नमक, टूथपेस्ट, बिस्कुट, नूडल्स, चॉकलेट, चाय, कॉफी, पैक्ड फूड, मसाले, सॉस और जैम।
हालात के आधार पर फैसले
बढ़ती लागत के असर को कम करने के लिए, कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने के अलावा दूसरे उपाय अपनाए हैं। बाज़ार के हालात को ध्यान में रखकर फैसले लिए जा रहे हैं।
कंपनियों ने कीमतें न बढ़ाने का फैसला क्यों किया?
इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि कुछ कंपनियों ने हाल के महीनों में ईरान-अमेरिका संघर्ष के असर के कारण कीमतें लगभग 2-5% बढ़ाई थीं, लेकिन मौजूदा रणनीति स्थिरता पर केंद्रित है। हालांकि, कीमतों में और बढ़ोतरी से बचने की कोशिश की जा रही है ताकि त्योहारों के मौसम में मांग पर कोई असर न पड़े।
FMCG कंपनियाँ कोको और पैकेजिंग कंपोनेंट्स जैसे कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर महसूस कर रही हैं। एशियाई व्यापार को प्रभावित करने वाले जियोपॉलिटिकल तनाव ने भी इन कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है।
कंपनियाँ लागत-नियंत्रण उपायों और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के ज़रिए बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद उठा रही हैं; नतीजतन, उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।
मांग बढ़ाने के पीछे कंपनियों का मकसद क्या है? कच्चे माल और प्रोडक्शन की लागत बढ़ने के दबाव के बावजूद, कंपनियाँ पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने के बजाय खर्चों को खुद ही मैनेज कर रही हैं। मुख्य मकसद त्योहारी सीज़न के दौरान ग्राहकों की खरीदारी को बढ़ावा देना है।
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GST दरों में कटौती का असर: पिछले साल, कई FMCG प्रोडक्ट्स पर GST दरों में कटौती से बिक्री में काफी बढ़ोतरी हुई, जिससे बाज़ार में माँग बढ़ी।
आम आदमी को फ़ायदा: हालाँकि कच्चे माल की लागत बढ़ने से भविष्य में कीमतें ऊपर-नीचे हो सकती हैं, लेकिन दिवाली तक रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।



