UP चुनाव 2027: सीट शेयरिंग पर सपा-कांग्रेस में बढ़ी खींचतान, इकरा हसन के बयान से पश्चिम यूपी की सियासत गरम

SP Congress Alliance News 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी वक्त है, लेकिन सियासी दलों के बीच तैयारियां तेज हो चुकी हैं। खासतौर पर विपक्षी गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी बातचीत अब सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंचती दिख रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश इस खींचतान का अहम केंद्र बन गया है।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर से सीट शेयरिंग को लेकर दिए जा रहे बयानों के बाद समाजवादी पार्टी ने भी अपना रुख साफ करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर में कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने की संभावना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इससे पश्चिम यूपी की सियासत में गठबंधन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
अक्टूबर तक सीटों पर फैसला चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने गठबंधन में सीटों के बंटवारे को जल्द अंतिम रूप देने की बात कही है। उनके मुताबिक अक्टूबर तक सीट शेयरिंग पर फैसला हो जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकती है।
मसूद ने यह भी कहा है कि बीजेपी के खिलाफ प्रभावी चुनावी मुकाबले के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व और कांग्रेस की भूमिका जरूरी है। उनके अनुसार सीटों को लेकर फैसला टलता रहा तो इसका असर जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं पर पड़ सकता है।
मसूद के इन बयानों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है।
इकरा हसन ने कांग्रेस को दिया जवाब
कांग्रेस सांसद के बयान के बाद सपा की ओर से कैराना सांसद इकरा हसन ने मोर्चा संभाला। सहारनपुर में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ मुकाबले में सपा की भूमिका अहम है और अखिलेश यादव के नेतृत्व को उन्होंने प्रमुखता दी।
इकरा हसन ने कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के विकल्प पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर दोनों दल साथ रहते हैं तो गठबंधन का स्वागत है। लेकिन अगर कांग्रेस अलग रास्ता चुनती है तो उसका राजनीतिक असर कांग्रेस को खुद देखना होगा।
उनके इस बयान को सपा की ओर से गठबंधन के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिमी यूपी में दोनों दलों के नेताओं के बयान अब सीट बंटवारे की बातचीत के अगले चरण के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है पश्चिमी उत्तर प्रदेश?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस दोनों की राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा में रही हैं। ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर होने वाली बातचीत केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है। दोनों दल अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत रखना चाहते हैं।
इमरान मसूद के लगातार मुखर रुख के बाद सपा ने भी अपने जवाब का तरीका बदला है। पहले पार्टी की ओर से प्रवक्ता राजीव राय ने प्रतिक्रिया दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी के करीबी नेताओं की ओर से भी शीर्ष स्तर पर बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की गई थी।
इसके बावजूद बयानबाजी पूरी तरह थमती नहीं दिखी। इसके बाद इकरा हसन को सामने लाया गया।
इकरा हसन को आगे करने के पीछे क्या संदेश?
कैराना की युवा सांसद इकरा हसन का पश्चिमी यूपी में राजनीतिक आधार है। ऐसे में उनके जरिए जवाब देना सपा के लिए स्थानीय स्तर पर संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक रूप से यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों पश्चिमी यूपी की राजनीति से जुड़े प्रमुख मुस्लिम चेहरे हैं। ऐसे में दोनों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने क्षेत्र की सियासत में एक नया आयाम जोड़ दिया है।
सपा के लिए यह संदेश अहम है कि पार्टी सीट शेयरिंग के सवाल पर कांग्रेस के दबाव में अपनी स्थिति कमजोर नहीं दिखाना चाहती। वहीं कांग्रेस की ओर से सीटों को लेकर जल्द फैसला करने की मांग यह संकेत देती है कि गठबंधन के भीतर चुनावी हिस्सेदारी को लेकर बातचीत आसान नहीं रहने वाली।
2027 से पहले गठबंधन की असली परीक्षा
विधानसभा चुनाव में अभी समय है। इसके बावजूद सीट शेयरिंग को लेकर सामने आ रहे बयान यह बताते हैं कि गठबंधन के घटक दल अपने-अपने राजनीतिक हितों को लेकर सक्रिय हो चुके हैं।
आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि सपा और कांग्रेस सीटों के बंटवारे पर किस तरह सहमति बनाते हैं। पश्चिमी यूपी में दोनों दलों के नेताओं की बयानबाजी इस बातचीत की दिशा को प्रभावित कर सकती है।
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फिलहाल इमरान मसूद के अक्टूबर तक सीटों पर फैसला करने वाले बयान और उसके बाद इकरा हसन की प्रतिक्रिया ने 2027 के चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति को जरूर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



