घुमन्तु जातियों ने की जमीन पट्टे की मांग, कहा– छत के बिना अधूरी है आज़ादी

मऊ। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की घुमन्तु जातियों ने जमीन पट्टे की मांग को लेकर मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी मऊ को आवेदन सौंपा है। बॉसफोर, डोम, धरिकार, पत्थरकट, मुसहर, बनवासी जैसी जातियों ने कहा कि आज़ादी के 79 साल गुजर जाने के बाद भी वे सड़क किनारे सिरकी डालकर असुरक्षित और अपमानजनक जीवन जीने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे रहने के कारण वे आए दिन दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। जबकि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को सिर ढकने के लिए पक्का मकान देने का वादा करता है। “मकान तभी बनेगा जब जमीन होगी, लेकिन हमारे पास अपने नाम से कोई जमीन ही नहीं है,” आवेदन में कहा गया।

आवेदकों ने बताया कि लगभग हर राजस्व गांव में कटौती और बंजर भूमि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिस पर अवैध कब्जा भी हो रखा है। इसकी सूचना 31 जुलाई 2025 को जिलाधिकारी मऊ को दी जा चुकी है।

घुमन्तु जातियों ने मांग की है कि शासनादेश पारित कर जिलाधिकारी को निर्देशित किया जाए कि जहाँ-जहाँ ये जातियां सड़क किनारे जीवन गुजार रही हैं, जैसे घोसी, पिढ़वल मोड़, कोपागंज, विक्कमपुर, सिपाह, मधुबन, दोहरीघाट, बरलाई, खुरहट, अमिला, बोझी, सॉहड़, रघौली, मझवारा व बढुआगोदाम, वहाँ न्याय पंचायत स्तर पर राजस्व गांवों की भूमि चिन्हित कर उन्हें जमीन का पट्टा दिया जाए।

इनका कहना है कि जमीन का पट्टा मिलने से वे स्थायी रूप से पक्के मकान बनाकर सुरक्षित जीवन जी सकेंगे और सरकार का “हर नागरिक को छत” का संकल्प भी पूरा हो सकेगा।

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