रँगा रक्त में झंडा अपने-आँगन में लहराऊंगी: सतीश
फिर वो रक्त माँग में भरकर,सातों वचन निभाऊंगी: मधुप

लखना,इटावा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के तत्वावधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन लखना में किया गया l कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रदेश उपाध्यक्ष एम पी सिंह तोमर, डॉ.एके शर्मा,गोपाल सारस्वत, जिलाध्यक्ष संतोष सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम संयोजक सुनीत सिंह चौहान ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया। कवि सम्मेलन में सरस्वती वंदना कवियत्री भूमिका जैन द्वारा प्रस्तुत की गयी। इसी क्रम में यशपाल यश फिरोजाबाद ने अपनी रचना में कहा कि हवा सदभाव की अब गांव में आने नहीं देती। प्यार के गीत मिलजुलकर हमें गाने नहीं देती । अमीरों के लिए सारे खजाने खोल देती है, सियासत रोटियां दो चैन से खाने नहीं देती। कवि सतीश मधुप घिरोर ने बलिदानी सैनिक की पत्नी के उद्गार। रँगा रक्त में झंडा अपने,आँगन में लहराऊंगी,फिर वो रक्त माँग में भरकर,सातों वचन निभाऊंगी। आर सोलह श्रृंगार रहूँगी,ईश्वर यही दुआ करती। अमर हुए सैनिक की पत्नी, विधवा नहीं हुआ करती। कवियत्री भूमिका जैन ने अपनी रचना में पढ़ा- साध्य मन की साधना का,गीत हूं सुन लीजिए।
शुद्धतम आराधना का,गीत हूं सुन लीजिए। द्वेष के प्रतिशोध के,प्रतियोगिता के दौर में, प्रेम की संभावना का,गीत हूँ सुन लीजिए। कवि रोहित चौधरी इटावा मुझको चाहत कभी नहीं है आसमान के तारों की, बेशर्म हवाओं के रुख पर चलने वाले दरबारों की। मैं भूषण की सिंह-गरजना,खुद में ताकत रखता हूँ,वंदे मातरम् होठों पर,और दिल में भारत रखता हूँ। कवि पदम अलबेला हाथरस ने कहा कि किसको पता है कि किसकी कितनी उम्र पड़ी है,ये ज़िंदगी है मौत से बेख़ौफ़ लड़ी है। प्लेटफार्म वो,परलोक का खाली नहीं अभी,मेरी ज़िंदगी की ट्रेन आउटर पे खड़ी है। कवि मोहित सक्सेना आगरा ने पढ़ा-गालीबाज़ बजा कर ताली वहाँ चिलम को फूंक गए शेर बना करते थे जो उनके मुंह पर ही भूंक गए नहीं हुआ करते थे इस्तीफे जिनकी सरकारों मे कुछ तिलचट्टे ऐसी सरकारों के मुँह पे थूक गए।
कवि उमेश द्विवेदी,औरैया फेसबुक इंस्टाग्राम पर रील बना लेती हूं। बात छोटी हो या बड़ी तिल का ताड़ बना लेती हूं।
खाना बनाना अभी तक नहीं सीख पाई हूं। उसको तो जोमिटो से मांगा लेती हूँ। इस मौके पर मेजर पाण्डेय,उमेश वर्मा,धर्मेंद्र भदौरिया,रणवीर सिंह चौहान, सुनीता कुशवाहा,राघव यादव, बृजेश शर्मा,प्रदीप कानौजिया, अनिल यादव,गोपाल वर्मा,डॉ. राम बिहारी तिवारी,शिवकुमार सिंह संजू चौहान,आलोक वर्मा,ब्रजमोहन राजावत,प्रकाश सोनी,संजय माहेश्वरी,राकेश यादव,दिनेश यादव,रेनू दीक्षित, विवेक यादव सन्नी,डॉ. सुरेन्द्र कुशवाहा,इंद्र कुमार जैन,राजेश द्विवेदी, सुघर सिंह चौहान,अभिषेक दीक्षित,रवि पोरवाल,विवेक पोरवाल, गिरीश शुक्ला,अनिल भदौरिया,सुन्दर लाल,अमरनाथ गुप्ता,राम चन्द्र गुप्ता,सोमेश अवस्थी,गोपाल त्रिपाठी,गिरजा शंकर त्रिपाठी,अनिल वीर सिंह चौहान,अशोक पोरवाल,राम शर्मा,सुधीर यादव,गौरव दुबे,मनोज यादव,लतीफ खान मंसूरी,सदन पोरवाल,अनिल भदौरिया,दीपक गुप्ता,रविकांत मिश्रा,महेश नायक आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।



