लापरवाह अफसरों पर जुर्माना लगाकर जरूरतमंद मरीजों का इलाज करा रहे गाजियाबाद के डीएम

20 से अधिक अधिकारियों पर 500 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना, नौ माह में 11 जरूरतमंदों को 4.51 लाख रुपये से अधिक की मदद

गाजियाबाद। आर्थिक तंगी के कारण उपचार नहीं करा पाने वाले जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने अनूठी पहल की है। सरकारी बैठकों से अनुपस्थित रहने और कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा रहा है। इस जुर्माने से मिलने वाली धनराशि रेडक्रॉस सोसाइटी के खाते में जमा कराई जाती है, जिसका इस्तेमाल जरूरतमंद मरीजों के उपचार में आर्थिक सहायता देने के लिए किया जाता है।

लापरवाही पर आर्थिक जुर्माने की व्यवस्था

जिला स्तरीय बैठकों में कई बार अधिकारी बिना उचित कारण बताए अनुपस्थित रहते हैं। वहीं, कुछ अधिकारी जरूरी कार्यों को लंबे समय तक लंबित रखते हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। ऐसे मामलों में पहले कारण बताओ नोटिस जारी करने और विभागीय कार्रवाई करने की व्यवस्था थी। अब जिलाधिकारी ने इसमें आर्थिक जुर्माने को भी शामिल किया है।

अब तक 20 से अधिक अधिकारियों पर 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें से अधिकतर अधिकारियों ने जुर्माने की राशि जमा भी करा दी है।

रेडक्रॉस सोसाइटी के खाते में जमा होती है राशि

जुर्माने से प्राप्त धनराशि रेडक्रॉस सोसाइटी के बैंक खाते में जमा कराई जाती है। जनसुनवाई में जब कोई जरूरतमंद व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण उपचार नहीं करा पाने की समस्या लेकर पहुंचता है, तो नियमानुसार उसे इसी धनराशि से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। इससे जरूरतमंद परिवारों को उपचार के लिए तत्काल मदद मिल सकती है।

नौ माह में 11 जरूरतमंदों को मिली मदद

जिलाधिकारी की इस पहल के तहत पिछले नौ माह में 11 जरूरतमंदों को उपचार के लिए कुल 4.51 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिल रही है। साथ ही, अधिकारियों पर आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होने से उनके कामकाज में जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद करना है।

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