जंतर मंतर पर चल रहे शिक्षा आंदोलन को अम्बेडकरी महिला मंच का सपोर्ट

नई दिल्ली. अम्बेडकरी महिला मंच की टीम बीते 4 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पहुँची। मंच के सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त किए जाने को लेकर चल रहे धरने और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों व सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनका समर्थन देने की बात कही।

अम्बेडकरी महिला मंच की महासचिव शालिनी ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा व्यवस्था में आए दिन होने वाली गड़बड़ियों के चलते और नीट की परीक्षाओं के पेपर लगातार लीक होने के कारण अब तक 22 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। जिस कारण देशभर में छात्रों की नाराज़गी बढ़ रही है। इसलिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए को पूर्ण रूप से खत्म किये जाने और नई शिक्षा नीति को वापस लिए जाने की माँग को लेकर जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट चल रहा है, जिसकी अगुवाई देश की सबसे नई राजनीतिक पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी कर रही है।

उनका साथ देते हुए देश के महान व्यक्तित्व सोनम वांगचुक समेत छात्र संगठन आइसा के सात छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं। टीम ने अनशनकारियों के साथ मंच साझा करते हुए अम्बेडकरी महिला मंच की दो सदस्याओं अनुराधा चौधरी और शालिनी ने सभी को आश्वस्त किया कि इस मुद्दे पर अम्बेडकरी महिला मंच की टीम पूरे दल बल और मज़बूती से उनके साथ खड़ी है।

मंच से अपनी बात रखते हुए अनुराधा चौधरी ने कहा कि पूरे देश के हालात आज ऐसे हैं कि पूरे युवाओं की माँग को दरकिनार किया जा रहा है। उनके लिए कोई शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। स्कूलों को बंद किया जा रहा है और रोज़गार माँगने पर युवाओं के साथ बर्बरता से पेश आती है। सरकार, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा माँगना बहुत छोटी बात है नैतिक आधार पर उन्हें खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर शालिनी ने अम्बेडकरी महिला मंच को ओर से अपनी बात रखते हुए सबसे पहले आत्महत्या करने वाले उन 22 बच्चों और उनके परिवार वालों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं क्योंकि परीक्षा तो अगली बार भी दी जा सकती है लेकिन जीवन अनमोल है और यह फिर नहीं मिलेगा। इसलिए आत्महत्या जैसी हरकतें युवा न करें।

उसके बाद उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक जैसा व्यक्तित्व किसी भी देश के लिए एक एसेट होता है। इससे पहले कि उनका स्वास्थ्य गिरे सरकार को इस आंदोलन के लिए संज्ञान लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने अभिजीत दीपके का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अभिजीत ने इस आंदोलन के ज़रिए इस देश के युवाओं को ये जता दिया कि एक सार्थक आंदोलन से सरकार की चूलें हिलाई जा सकती हैं। बात सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की नहीं है संस्थाओं के निर्माण पर भी ध्यान देना चाहिए…. एक सशक्त आंदोलन के माध्यम से युवा देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकते हैं।

एडवोकेट रूबी ने अपने विचार दृढ़ता से व्यक्त करते हुए कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है अगर यहाँ का युवा ही परेशान है तो फिर सरकार राजनीति करोगी किसपर। देश का युवा आपसे अपना बेहतर शिक्षा का अधिकार माँग रहा है आपकी धन-दौलत नहीं माँग रहा है और एक बेहतर शिक्षा व्यवस्था सरकार को उसे देनी चाहिए, एक ज़िम्मेदार सरकार एक अच्छा देश बन सकती है। ये आंदोलन एक बदलाव की खनक है जो आगे चलकर एक नज़ीर बनेगा।

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