एसिडिटी या हार्ट अटैक, एक गलती पड़ सकती है भारी, इन संकेतों को पहचानें

Chest Pain Gas or Heart Attack: सीने में अचानक तेज दर्द, जलन या भारीपन का अहसास होते ही अधिकांश लोग इसे खान-पान की गड़बड़ी, अपच या गैस और एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई मामलों में इसकी असली वजह पेट से जुड़ी सामान्य खराबी ही होती है, लेकिन हर बार ऐसा सोचना भारी भूल साबित हो सकता है।
हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों और साइलेंट हार्ट अटैक में भी सीने में बेचैनी, तेज दबाव या असामान्य भारीपन के लक्षण उभरते हैं। जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील कुमार मंडल (MBBS, MD, DM कार्डियोलॉजी) का कहना है कि सिर्फ सतही लक्षणों को देखकर खुद डॉक्टर न बनें और सीने की तकलीफ के साथ दिखने वाले शरीर के रेड फ्लैग संकेतों को कतई नजरअंदाज न करें।
गैस जैसा क्यों महसूस होता है दिल का दर्द?
मानव शरीर की शारीरिक संरचना के अनुसार दिल और पेट का ऊपरी हिस्सा एक-दूसरे के बेहद करीब स्थित होते हैं। दोनों अंगों की तंत्रिकाएं (Nerves) मस्तिष्क तक दर्द के संकेत ले जाने में कई बार एक जैसे पाथवे साझा करती हैं। यही वजह है कि जब हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज के कारण रक्त संचार बाधित होता है, तो हर मरीज को हमेशा सीने में तीखा या चीरने वाला दर्द ही नहीं होता। कई बार यह केवल सीने में हल्का भारीपन, खिंचाव, जलन, कसाव या अजीब सी असहजता के रूप में प्रकट होता है, जिसे लोग गलती से एसिड रिफ्लक्स या अपच मानकर बैठ जाते हैं।
ये 7 खतरे के संकेत दिखें तो तुरंत हो जाएं सतर्क
अगर सीने की बेचैनी या भारीपन कुछ मिनटों से ज्यादा समय तक लगातार बना रहे, रुक-रुक कर बार-बार लौटे या फिर सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने और शारीरिक मेहनत करते वक्त बढ़ जाए, तो इसे गलती से भी सामान्य न मानें। खासकर तब जब सीने के दर्द का फैलाव बायीं या दायीं बांह तक होने लगे, दर्द पीठ के ऊपरी हिस्से, गर्दन या जबड़े की तरफ खिंचे, अचानक सांस फूलने लगे, बिना गर्मी के माथे पर ठंडा पसीना आने लगे, लगातार जी मिचलाए या उल्टी जैसा महसूस हो, अचानक चक्कर आकर आंखों के आगे अंधेरा छाए या अत्यधिक घबराहट और बेचैनी होने लगे।
क्या घर बैठे खुद पहचान सकते हैं गैस और हार्ट अटैक का अंतर?
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ के अनुसार घर पर ऐसा कोई पक्का घरेलू या चिकित्सीय तरीका मौजूद नहीं है, जिससे कोई सामान्य व्यक्ति शत-प्रतिशत यह दावा कर सके कि दर्द केवल गैस का है या हृदय घात का। हालांकि, एसिडिटी या गैस्ट्रिक दर्द अक्सर ज्यादा भोजन करने के बाद, तीखा-मसालेदार खाने पर या तुरंत लेटने पर सीने में जलन और खट्टी डकारों के रूप में बढ़ता है। इसके विपरीत, इन लक्षणों की मौजूदगी इस बात की गारंटी नहीं देती कि आपकी हृदय धमनियां पूरी तरह सुरक्षित हैं, क्योंकि हृदय रोग के कई लक्षण भी भोजन के बाद अचानक ट्रिगर हो सकते हैं।
एंटासिड या गैस की गोली से आराम मिलना क्यों धोखे जैसा है?
अक्सर लोग सीने में जलन होने पर एंटासिड सिरप या गैस की दवा ले लेते हैं और थोड़ी देर में दर्द धीमा पड़ने पर राहत की सांस ले लेते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह एक बड़ा मेडिकल भ्रम हो सकता है। दिल के एंजाइना या इस्कीमिक दर्द की तीव्रता भी कई बार अपने आप घटती-बढ़ती रहती है। दवा लेने के बाद यदि दर्द थोड़ा कम भी हो जाए, लेकिन साथ में हल्का पसीना, सांस में भारीपन या जबड़े में खिंचाव बना रहे, तो इसे पूरी तरह ठीक मान लेना मरीज की जान को जोखिम में डाल सकता है।
इन हाई-रिस्क लोगों को बरतनी चाहिए दोगुनी सावधानी
डायबिटीज (शुगर), हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन), मोटापा, अत्यधिक तनाव, धूम्रपान की लत या पहले से हार्ट की हिस्ट्री वाले मरीजों को सीने की किसी भी तकलीफ पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए। अगर परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट की फैमिली हिस्ट्री रही हो, तो और ज्यादा सतर्कता जरूरी है। आज के दौर में युवा भी बड़े पैमाने पर हृदय रोगों के शिकार हो रहे हैं, इसलिए कम उम्र को सुरक्षा की गारंटी मानना सबसे बड़ी भूल है।
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कब बिना देर किए सीधे इमरजेंसी या अस्पताल भागें?
सीने में अचानक असहनीय खिंचाव, भारी दबाव या पत्थर जैसा वजन महसूस होना, दर्द का लगातार बने रहना, चलने-फिरने पर सांस टूटना, शरीर ठंडा पड़ जाना या चक्कर आना सीधे तौर पर मेडिकल इमरजेंसी के संकेत हैं। ऐसे गंभीर हालात में घरेलू नुस्खों, चूर्ण या गैस की गोलियों के भरोसे समय बर्बाद करने के बजाय तत्काल नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जाकर ईसीजी (ECG) और जरूरी कार्डियक जांच करवानी चाहिए।



