‘तो रणजी ट्रॉफी खेलना बंद कर दो’: टीम इंडिया के चयन पर भड़के पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर

Vengsarkar on BCCI Selectors: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर ने राष्ट्रीय चयन समिति (Selection Committee) की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
वेंगसरकर इस बात को लेकर बेहद नाराज और आहत हैं कि देश के प्रमुख घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट, विशेष रूप से प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में वह सम्मान और अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके वे सही मायने में हकदार हैं। पूर्व दिग्गज ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि घरेलू प्रतियोगिताओं में पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय चयन का आधार ही नहीं माना जाना है, तो फिर ऐसे भारी-भरकम टूर्नामेंट आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
‘अगर चयन नहीं करना, तो रणजी ट्रॉफी को ही खत्म कर दीजिए’
मीडिया से बातचीत के दौरान अपनी गहरी निराशा व्यक्त करते हुए दिलीप वेंगसरकर ने सीधे तौर पर चयनकर्ताओं के रवैये पर उंगली उठाई। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा, “अगर आपको लगता है कि घरेलू मैचों का प्रदर्शन टीम इंडिया में चयन का पैमाना नहीं है, तो रणजी ट्रॉफी को पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। इसे मत खेलिए। आखिर इस टूर्नामेंट की जरूरत ही क्या है? एक क्रिकेटर इसके लिए साल भर खून-पसीना एक करता है, टीम को मैच जिताने, पहाड़ जैसे रन बनाने और लगातार विकेट चटकाने में अपनी पूरी ताकत झोंक देता है। अगर इतने असाधारण प्रदर्शन के बाद भी उन्हें भारतीय टीम की कैप नहीं मिलती, तो यह खिलाड़ियों के करियर और उनके कीमती समय की सरासर बर्बादी है।”
आकिब नबी और मोहम्मद शमी की अनदेखी पर चयनकर्ताओं को घेरा
वेंगसरकर ने अपनी बात के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के उभरते हुए तेज गेंदबाज आकिब नबी का विशेष तौर पर हवाला दिया। आकिब ने घरेलू सत्र में अपनी धारदार गेंदबाजी से जबर्दस्त प्रभाव छोड़ा था और हालांकि उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ चुनी गई वनडे टीम में शामिल तो किया गया, लेकिन प्लेइंग इलेवन में उन्हें अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने का मौका अब तक नहीं दिया गया है। इसके अलावा वेंगसरकर ने अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को टीम से बाहर रखे जाने पर भी भारी आश्चर्य और ऐतराज जताया।
इस खेल में भी भारत ने पाकिस्तान को दी पटखनी, लोग- बोले किसी चीज में तो हराओ
37 विकेट और दलीप ट्रॉफी जीत के बाद भी शमी दरकिनार
आंकड़ों का हवाला देते हुए वेंगसरकर ने याद दिलाया कि मोहम्मद शमी ने हालिया रणजी ट्रॉफी सीजन में 17 से भी कम के शानदार गेंदबाजी औसत से 37 विकेट चटकाए थे। इतना ही नहीं, उन्होंने गेंद से कहर बरपाते हुए ईस्ट जोन को 2026 दलीप ट्रॉफी का प्रतिष्ठित खिताब जिताने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाई थी। क्रिकेट विशेषज्ञों और जानकारों को भी यह बात कतई समझ नहीं आ रही है कि जब एक विश्वस्तरीय गेंदबाज पूरी तरह फिट होकर घरेलू मैदानों पर विकेटों की झड़ी लगा रहा है, तो फिर उन्हें राष्ट्रीय टीम की मुख्य योजनाओं से बाहर क्यों रखा जा रहा है। वेंगसरकर के इस तीखे बयान ने भारतीय क्रिकेट के चयन तंत्र में घरेलू क्रिकेट की अहमियत को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।


