बरसात में 3 दिन से ज्यादा का बुखार हो सकता है खतरनाक, डॉक्टर से जानें कौन सा टेस्ट कराना है जरूरी

Monsoon Fever Causes: बारिश का मौसम भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से भले ही राहत लेकर आता है, मगर यह अपने साथ कई तरह के गंभीर संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी साथ लाता है। बरसात में जलजमाव, सीलन और नमी के कारण मच्छर, बैक्टीरिया और खतरनाक वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं। यही मुख्य वजह है कि मानसून सीजन में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का प्रकोप कई गुना बढ़ जाता है।
सामान्य वायरल समझकर न करें नजरअंदाज
अक्सर लोग मौसम बदलते ही बुखार आने पर इसे सामान्य वायरल समझ लेते हैं और मेडिकल स्टोर से खुद ही दवाइयां लेकर खाने लगते हैं। हालांकि, यदि मानसून के दौरान बुखार लगातार तीन दिन या उससे अधिक समय तक बना रहे, तो यह किसी गंभीर और छिपे हुए संक्रमण का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
ऐसे में लंबे समय तक बुखार रहने पर समय पर ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी जांच कराना बेहद आवश्यक होता है। यदि समय रहते सही जांच न कराई जाए, तो लापरवाही के कारण मरीज की स्थिति काफी बिगड़ सकती है। जाने-माने सीनियर कंसल्टेंट डॉ. शशांक खन्ना बता रहे हैं कि लगातार तीन दिनों तक बुखार रहने पर आपको कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट करवाने चाहिए।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर
विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, तीन दिन से निरंतर बुखार रहना यूं तो सामान्य वायरल संक्रमण का भी संकेत हो सकता है, मगर इसे कभी भी हल्के में लेना सही फैसला नहीं है। खासकर यदि इस बुखार के साथ-साथ तेज सिरदर्द, पूरे शरीर में दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, बार-बार उल्टी, दस्त या फिर अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज के लक्षणों, उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री और आसपास फैले संक्रमण के जोखिम को बारीकी से परखते हुए लेप्टोस्पायरोसिस सहित अन्य खतरनाक बीमारियों की जांच करवाने की सलाह देते हैं।
क्या होता है लेप्टोस्पायरोसिस टेस्ट और इसके खतरे?
लेप्टोस्पायरोसिस एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों, विशेष तौर पर चूहों के मूत्र से दूषित हुए पानी या मिट्टी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
मानसून के मौसम में जगह-जगह जलभराव और गंदे पानी में नंगे पैर चलने से इस बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नगर निगम के कर्मचारियों, किसानों, सफाईकर्मियों और बाढ़ या जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इसका सबसे ज्यादा जोखिम होता है।
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इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर आम वायरल फीवर, डेंगू या मलेरिया जैसे ही लगते हैं, जिनमें तेज बुखार, शरीर में कंपकंपी के साथ ठंड लगना, मांसपेशियों में भयंकर दर्द, सिरदर्द, आंखों का लाल होना और गंभीर थकान शामिल हैं। कुछ अत्यधिक गंभीर मामलों में यह जानलेवा संक्रमण किडनी, लिवर और फेफड़ों तक को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जिससे पीलिया, सांस लेने में भारी तकलीफ या अंगों का काम करना बंद होने जैसी आपातकालीन दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।



