Lunar Eclipse 2026: जानें चंद्र ग्रहण का समय, इन 2 राशियों पर टूटेगा दुखों का पहाड़

Lunar Eclipse 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार 3 मार्च को लग रहा है। यह ग्रहण ‘टोटल लूनर एक्लिप्स’ है और होली के दिन पड़ने से इसका महत्व और बढ़ जाता है। कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगने वाला यह ग्रहण ज्योतिष के हिसाब से भारत के साथ-साथ दुनिया के कई हिस्सों में भी महत्वपूर्ण होगा।

चंद्र ग्रहण का समय

चंद्रग्रहण का खग्रास शाम 4:34 मिनट पर शुरू होगा। खग्रास का मतलब होता है जब चंद्रमा पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। चंद्र ग्रहण के दिन भारत में चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। वहीं चंद्र ग्रहण की समाप्ति 6 बजकर 47 मिनट पर होगी।

ज्योतिषीय असर:

1. कन्या और मीन राशि पर सबसे ज़्यादा असर:

क्योंकि यह ग्रहण कन्या राशि में हो रहा है, इसलिए कन्या और इसके विपरीत मीन राशि वालों को ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है। उन्हें मानसिक तनाव या सेहत से जुड़ी शिकायतें हो सकती हैं।

2. इमोशनल अस्थिरता:

चूंकि चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इस दौरान लोगों को बेवजह चिड़चिड़ापन, डर या इमोशनल उलझन महसूस हो सकती है। ज़रूरी फ़ैसले लेते समय जल्दबाज़ी न करें।

3. होली के त्योहार पर असर:

चूंकि ग्रहण होली के दिन ही है, इसलिए रंग खेलते समय और त्योहार मनाते समय सावधान रहना ज़रूरी है। चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन एक दिन पहले यानी 2 मार्च को किया जाएगा और ग्रहण का समय 3 मार्च को देखा जाएगा।

4. प्राकृतिक और राजनीतिक बदलाव:

यह ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं या राजनीतिक क्षेत्र में बड़े बदलावों का संकेत देता है। शेयर बाज़ार और सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।

चंद्र ग्रहण के नियम

चंद्र ग्रहण सिर्फ़ एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह समय आध्यात्मिक नज़रिए से बहुत सेंसिटिव माना जाता है। इस दौरान, वातावरण में मौजूद सूक्ष्म तरंगें हमारे खाने और मन पर असर डालती हैं।

1. ग्रहण किसे देखना चाहिए और किसे नहीं?

सामान्य रूप से स्वस्थ लोगों को ग्रहण और उसके वेध का सख्ती से पालन करना चाहिए। ग्रहण के दौरान शारीरिक और मानसिक ऊर्जा की रक्षा करना ज़रूरी है। बच्चों, बुज़ुर्गों, बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को शास्त्रों में ग्रहण के कड़े नियमों से छूट दी गई है। उन्हें अपनी सेहत के हिसाब से खाना और आराम करना चाहिए, लेकिन हो सके तो भगवान का नाम ज़रूर लेना चाहिए।

2. क्या खाएं और क्या न खाएं?

ग्रहण वेध के समय (सूतक काल में) से ही खाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि ग्रहण के दौरान पका हुआ खाना खराब हो जाता है, इसलिए ग्रहण से पहले खाना खत्म कर लेना चाहिए। ग्रहण के दौरान हो सके तो पानी पीने से भी बचना चाहिए। हालांकि, अगर ज़रूरी हो तो तुलसी के पत्ते वाला पानी पिएं। दूध, दही या घर में रखे पानी में तुलसी के पत्ते या दरभा मिलाएं। इससे इसके नैचुरल गुण बने रहते हैं और ग्रहण की लहरों का इस पर असर नहीं पड़ता। ग्रहण खत्म होने के बाद नहाना और ताज़ा पका हुआ खाना खाना सबसे अच्छा माना जाता है।

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3. ग्रहण के दौरान किन चीज़ों से बचना चाहिए

ग्रहण के दौरान सोने से बचें (बीमार लोगों के लिए छोड़कर)। ग्रहण के दौरान सब्ज़ी काटना, कपड़ा काटना या सिलाई करना अशुभ माना जाता है। ग्रहण के दौरान कोई भी नया या ज़रूरी काम शुरू न करें।

 

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