बगैर सुनवाई 12 महीने तक हिरासत! सरकार ला रही सख्त कानून, संपत्ति नीलाम कर पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

West Bengal New Law 2026: पश्चिम बंगाल की सरकार अगले सप्ताह विधानसभा के बजट सत्र में कानून-व्यवस्था को और सख्त बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानूनों में समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनके तहत किसी आरोपी को बिना मुकदमे की सुनवाई के अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकेगा। इतना ही नहीं, यदि किसी अपराध से किसी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान पहुंचता है तो आरोपी की संपत्ति नीलाम कर पीड़ित को मुआवजा देने का भी प्रावधान रखा गया है।

अगले सप्ताह विधानसभा में पेश होंगे दो बड़े विधेयक

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक-2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक विधानसभा में पेश किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन कानूनों का उद्देश्य संगठित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

बताया जा रहा है कि इसी प्रकार के कानून पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी लागू किए जा चुके हैं, हालांकि उन्हें लेकर समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी विवाद भी सामने आए थे।

बिना सुनवाई एक साल तक हिरासत का प्रावधान

प्रस्तावित कानून का सबसे चर्चित प्रावधान यह है कि कुछ विशेष मामलों में आरोपी को बिना मुकदमे की सुनवाई के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकेगा। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति अपराध के माध्यम से किसी को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है तो उसकी चल-अचल संपत्ति जब्त कर नीलाम की जा सकती है और उससे प्राप्त राशि पीड़ित को दी जाएगी।

सरकारी मसौदे के अनुसार, अवैध खनन, बालू खनन, प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन, वन संपदा की तस्करी और अन्य संगठित अपराधों को भी समाज विरोधी गतिविधियों की श्रेणी में शामिल किया गया है।

महुआ मोइत्रा ने बताया लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा

प्रस्तावित कानूनों को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने इन विधेयकों को बेहद कठोर बताते हुए कहा कि यह कानून आपातकाल के दौरान लागू मीसा और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) से भी ज्यादा सख्त प्रतीत होता है।

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उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के एक वर्ष तक हिरासत में रखा जा सकता है तो न्यायिक सुरक्षा का क्या अर्थ रह जाएगा। उनके अनुसार इससे पुलिस को केवल संदेह के आधार पर भी अत्यधिक अधिकार मिल सकते हैं।

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