हॉर्मुज जलसंधि पर ट्रंप को इन देशों ने खुलकर किया मना, जानें लिस्ट में कौन कौन
Trump on Hormuz Force: हॉर्मुज जलसंधि पर बढ़ते तनाव ने दुनिया के तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर संकट पैदा कर दिया है। अमेरिका इंटरनेशनल फोर्स बनाने की कोशिश कर रहा है मगर कई बड़े देश पीछे हट रहे हैं।

Trump on Hormuz Force: मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से हॉर्मुज जलसंधि अब सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं रह गया है बल्कि वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की खेप इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में किसी भी रुकावट का असर सीधे तेल की कीमतों और आम जनता पर पड़ता है।
अमेरिका का इंटरनेशनल फोर्स प्लान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कई देशों से अपील की है कि वे अपने युद्धपोत भेजकर हॉर्मुज जलसंधि को सुरक्षित बनाएँ। ट्रंप चाहते हैं कि चीन, जापान, फ्रांस, साउथ कोरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश इस मिशन में शामिल हों। उनका लक्ष्य है तेल और व्यापारिक मार्ग को खुला रखना ताकि वैश्विक बाजार स्थिर रह सके।
इन देशों ने ट्रंप को किया मना
मगर ट्रंप की अपील पर कई बड़ी ताकतों ने साफ दूरी बनाई है। चीन ने स्पष्ट कहा कि वह तनाव को कम करने की कोशिश करेगा मगर अमेरिकी मिशन में शामिल नहीं होगा। जर्मनी ने सीधे शक जताया और कहा कि वे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे। फ्रांस ने भी कहा कि तब तक कोई अंतरराष्ट्रीय मिशन नहीं होगा जब तक स्थिति शांत नहीं हो जाती। ब्रिटेन ने भी कोई सैन्य कमिटमेंट नहीं दिया।
भारत की कूटनीतिक पहल
इसी बीच भारत ने अलग रास्ता अपनाया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान से बातचीत कर दो भारतीय गैस टैंकरों को सुरक्षित मार्ग दिलवाया। यह दिखाता है कि अमेरिका जहां सैन्य ताकत से समाधान चाहता है, वहीं भारत कूटनीति के माध्यम से समस्या का हल ढूँढ रहा है।
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ईरान ने कहा है कि उसने पूरी तरह मार्ग बंद नहीं किया है। उसका दावा है कि केवल उन देशों के जहाजों को रोका जा रहा है जो अमेरिका और इज़राइल के साथ हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका नेवी भेजने की कोशिश करता है तो उसका सामना करेगा।



