मुफ़्त की चीजों में रुचि और शिक्षा के प्रति उदासीनता विषय पर कार्यक्रम का आयोजन 

राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले महिला उन्नयन समिति और अम्बेडकरी महिला मंच की साझी पेशकश में कार्यक्रम का किया गया आयोजन 

स्टार एक्सप्रेस संवाददाता

रायबरेली. जनपद के महाराजगंज के ग्राम सभा मोन में रविवार को एक शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले महिला उन्नयन समिति और दिल्ली से अम्बेडकरी महिला मंच की साझी पेशकश में किया गया।

कार्यक्रम का विषय था मुफ़्त की चीजों में रुचि और शिक्षा के प्रति उदासीनता। इस कार्यक्रम की सूत्रधार रहीं राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले महिला उन्नयन समिति की अध्यक्ष संगीता रावत और कार्यकारिणी सदस्य सुमित्रा रावत और रामावती।

कार्यक्रम की खासियत यह रही कि कार्यक्रम पूर्व प्रधान स्वर्गीय सुखई पासी के पुश्तैनी घर के प्रांगण में उन्हें याद करते हुए आयोजित किया गया जिसमें मुख्य रूप से बालिकाओं और महिलाओं की भागीदारी रही।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बालिकाओं ने उच्च शिक्षा में आने वाली दिक्कतों के ऊपर अपने विचार रखे।

साथ ही बालिकाओं ने यह भी बताया कि लड़कियों की उच्च शिक्षा व्यवस्थित रूप से चल सके इसके लिए उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ज्ञापन सौंपते हुए ज़िले में एक गर्ल्स हॉस्टल खोला जाए इसकी माँग भी की है जिसपर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है, जिसे लेकर बालिकाओं ने रोष भी व्यक्त किया।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि सन्तोष इंदौरा ने मुफ़्त की चीज़ों पर अपनी बात रखते हुए उदाहरण सहित समझाया कि किस प्रकार लखनऊ के नवाब आसिफ़उद्दौला ने अपने शासनकाल के दौरान पड़े अकाल में पीड़ितों की मदद करने हेतु इमामबाड़ा का निर्माण करवाया जिससे सैकड़ों लोगों को रोज़गार व भोजन मिला, साथ ही उन्होंने कहा कि आज की सरकार को इससे प्रेरणा लेते हुए मुफ्त के राशन की जगह लोगों को काम देना चाहिए जिससे के अपने लिए राशन की व्यवस्था स्वयं कर सकें।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में शालिनी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें उन कारणों की तलाश भी करनी चाहिए कि सवर्ण स्त्रियाँ तो शिक्षा को माध्यम बना आगे बढ़ गईं और दलित स्त्रियाँ क्यों शिक्षा में इतनी पिछड़ गईं कि हाशिए से ही बाहर हो गईं, जबकि सावित्रीबाई फूले ने समाज के सभी वर्गों की महिलाओं के लिए शिक्षा के दरवाज़े समान रूप से खोले थे।

साथ ही उन्होंने कहा कि जितना लड़कियों को शिक्षित किये जाने की ज़रूरत है उतना ही लड़को को व्यवहारिक रूप से शिक्षित किये जाने की भी ज़रूरत है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं संगीता रावत ने बालिकाओं द्वारा अपने विचार व्यक्त किये जाने और गर्ल्स हॉस्टल की माँग को लेकर सराहना की और कहा कि कोई सरकार अपनी जेब से मुफ़्त में कुछ नहीं देती वो जनता के रूप में आप ही लोगो का पैसा होता है।

अपनी बात को स्पष्ट रूप से रखते हुए संगीता ने कहा कि मुफ़्त की चीज़ों को लेने से इनकार करना चाहिए क्योंकि ये कहीं न कहीं आपके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया सुनियोजित कार्य होता है। इसलिए दलित समाज को मुफ़्त की चीज़ों पर खुश न होते हुए शिक्षा की माँग को पुरज़ोर उठाना चाहिए।

कार्यक्रम में कुमकुम, मीनाक्षी, पल्लवी आदि बालिकाओं ने वक्ता के तौर पर अपने विचार प्रस्तुत किये और अन्य स्त्रियों ने भी स्त्री शिक्षा पर अपने विचार रखे।

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