मकर संक्रांति की आहट से वाराणसी के बाजार गुलजार, 15 जनवरी को स्नान-दान का विशेष महत्व

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी में मकर संक्रांति पर्व की आहट अब बाजारों से लेकर घर-आंगन तक सुनाई देने लगी है। शहर के चेतगंज, लहुराबीर, जगतगंज, लक्सा, औरंगाबाद मार्ग और लंका समेत कई इलाकों में तिल, पट्टी, गजक, गुड़ की पट्टी और ढूंढ़ा लाई की अस्थायी दुकानें सज गई हैं। पर्व की तैयारियों के चलते बाजारों में लोगों की चहल-पहल बढ़ गई है और खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है।
गुड़ और तिल से बनी मिठाइयों की खुशबू से पूरा बाजार पर्वमय नजर आ रहा है। परंपरा के अनुसार शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपनी बहन-बेटियों के यहां खिचड़ी भेज रहे हैं, जिसमें तिल की पट्टी, गजक, वस्त्र और साड़ियां शामिल हैं। हालांकि बढ़ती महंगाई और व्यस्त जीवन शैली के कारण यह परंपरा अब सीमित लोगों तक सिमटती दिखाई दे रही है।
तिल पट्टी विक्रेता राजेश कुमार के अनुसार मकर संक्रांति को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। लोग अपनी पसंद के अनुसार गुड़ की पट्टी, गजक, तिल और ढूंढ़ा खरीद रहे हैं। वर्तमान में गुड़ की पट्टी 160 रुपये प्रति किलो, जबकि गजक 200 से 250 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है। बच्चों में भी पर्व को लेकर खास उत्साह है—वे पतंग और परेती की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे पतंग बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है।
15 जनवरी को स्नान-दान का विशेष महत्व
पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसके साथ सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत होती है। सनातन धर्म में सूर्य का उत्तरायण होना शुभ माना गया है। मान्यता है कि सूर्य देव वर्ष में लगभग छह महीने उत्तरायण और छह महीने दक्षिणायन रहते हैं।
इस वर्ष सूर्य देव 14 जनवरी को अपराह्न 3 बजकर 7 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रमण अपराह्न में होने के कारण पवित्र नदियों में स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए 15 जनवरी का दिन अधिक शुभ माना जा रहा है। तनुज खन्ना राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय पंजाबी युवा संगठनके अनुसार 15 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही चतुर्ग्रही योग और वृद्धि योग भी रहेगा, जिससे यह दिन विशेष रूप से पुण्यदायक होगा। इस दिन तिल, गुड़, चावल और वस्त्रों का दान करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है



