शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच की मांग
शंकराचार्य व उनके शिष्यों पर दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच की मांग

मऊ। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने ज्ञापन दिया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय के निर्देश पर 25 फरवरी 2026 को सभी जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार सही सुझाव देने वालों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उनका आरोप है कि ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सरकार की नीतियों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं, जिसके कारण उन्हें और उनके शिष्यों को परेशान किया जा रहा है।
कांग्रेस के अनुसार, कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य और उनके शिष्यों को स्नान करने से रोका गया था। आरोप है कि उनके साथ आए बटुकों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें थाने ले जाकर प्रताड़ित किया गया। अब शंकराचार्य, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य लोगों के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज कराए जाने को कांग्रेस ने साजिश करार दिया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धार्मिक मामलों के संचालन का अधिकार प्राप्त है। शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पद माना जाता है, इसलिए इस पद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।
कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों की भी जांच की जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जिला कांग्रेस कमेटी और शहर कांग्रेस कमेटी मऊ ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, गंभीर और पारदर्शी जांच कराकर त्वरित ढंग से गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराया जाए, ताकि आम लोगों की धार्मिक भावनाओं को कोई ठेस न पहुंचे और न्याय सुनिश्चित हो सके।



