क्या मोबाइल, टीवी, AC सस्ते होंगे? गैजेट इंडस्ट्री को बजट में मिला बूस्टर डोज, होंगे ये बड़े फायदे
Budget 2026 live updates: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में फाइनेंशियल ईयर 2026-27 का बजट पेश किया। भारत सरकार ने ‘इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ के तहत खर्च बढ़ा दिया है। इस स्कीम का प्रोविजन करीब 23 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है।
इस बड़े फंड से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत होगा और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी। इस फैसले से विदेशी कंपनियों को अपनी यूनिट्स लगाने और भारत में इन्वेस्ट करने के लिए बढ़ावा मिलेगा।
स्मार्टफोन, टीवी, एसी को फायदा होगा
इस स्कीम से स्मार्टफोन, लैपटॉप, माइक्रोवेव, फ्रिज और टोस्टर जैसे घरेलू प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए विदेशों पर निर्भरता कम होगी। प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा, मगर अगर मैन्युफैक्चरर्स को सस्ते रेट्स पर स्पेयर पार्ट्स मिलते हैं, तो भविष्य में भारत में सस्ते गैजेट्स मिल सकते हैं। इससे इस सेक्टर में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे।
फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि यह स्कीम अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ रुपये के फंड के साथ लॉन्च की गई थी। हालांकि, मिले इन्वेस्टमेंट प्रपोज़ल और मकसद को देखते हुए, सरकार ने इस फंड को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रपोज़ल दिया है।
बड़े इन्वेस्टमेंट और रोज़गार की उम्मीद
यूनियन कैबिनेट ने मार्च में इस स्कीम को मंज़ूरी दी थी। इससे 4.56 लाख करोड़ रुपये का आउटपुट और करीब 59,350 करोड़ रुपये का एडिशनल इन्वेस्टमेंट होने की उम्मीद है।
अब तक 46 एप्लीकेशन मंज़ूर हो चुकी हैं
कुल 54,567 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट प्रपोज़ल हैं। इससे करीब 51,000 लोगों को सीधे रोज़गार मिलने की संभावना है।
पिछले महीने ही फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, सैमसंग, डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ और हिकाल्को इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों की 22 एप्लीकेशन मंज़ूर हुई हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलेगा
सरकार इस स्कीम के तहत खास तौर पर इन इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा दे रही है:
डिस्प्ले मॉड्यूल
सब-असेंबली कैमरा मॉड्यूल
प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA)
लिथियम सेल एनक्लोजर
रेसिस्टर्स
कैपेसिटर
फेराइट्स
यह स्कीम PLI से कैसे अलग है?
यह स्कीम सरकार की पिछली ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) स्कीम से अलग है। PLI में सब्सिडी प्रोडक्शन के आधार पर मिलती है, जबकि इस नई स्कीम में इंसेंटिव इन तीन क्राइटेरिया पर दिए जाएंगे:
- 1. सालाना रोजगार पैदा करना
- 2. कैपिटल खर्च (Capex)
- 3. सालाना प्रोडक्शन
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हालांकि एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों ने भारत में असेंबली यूनिट शुरू कर दी हैं, मगर अभी देश में वैल्यू एडिशन सिर्फ 15-20% है। सरकार इस रेश्यो को बढ़ाकर 30-40% करना चाहती है।



