टॉयलेट में की गई ये 2 गलतियां दे सकती हैं बवासीर का असहनीय दर्द, डॉक्टरों ने चेताया

hemorrhoids toilet habits: पाइल्स यानी बवासीर एक बेहद तकलीफदेह और गंभीर समस्या है, जिसमें गुदा (एनस) के आसपास की रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है और मस्से बन जाते हैं। इसके चलते मल त्यागते समय तेज दर्द, जलन, असहनीय खुजली और कई बार खून आने की शिकायत हो जाती है, जिससे व्यक्ति का उठना-बैठना तक दूभर हो जाता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि यह समस्या केवल गलत खान-पान या कब्ज की वजह से होती है, लेकिन कई बार अनजाने में टॉयलेट में की जाने वाली रोजमर्रा की गलतियां भी इसकी मुख्य वजह बन जाती हैं। मशहूर चिकित्सक डॉ. तनय मिश्रा ने सोशल मीडिया पर इस बात का खुलासा करते हुए टॉयलेट से जुड़ी उन आदतों से बचने की सलाह दी है जो बवासीर के खतरे को अचानक बढ़ा देती हैं।
सबसे बड़ी गलती है ये चीज
डॉक्टर के अनुसार पहली सबसे बड़ी गलती है मल त्याग के दौरान आवश्यकता से अधिक जोर लगाना। कई बार पेट पूरी तरह साफ न होने के भ्रम में लोग अनावश्यक दबाव (एब्डॉमिनल प्रेशर) बनाते रहते हैं। पेट और पेल्विक हिस्से पर लंबे समय तक इस तरह बेवजह का दबाव डालने से गुदा के आसपास की नसें फूलने लगती हैं, जो आगे चलकर पाइल्स का रूप ले लेती हैं। दूसरी आम गलती है टॉयलेट सीट पर बैठकर घंटों मोबाइल फोन स्क्रॉल करना या अखबार पढ़ना। सामान्य कुर्सी के मुकाबले कमोड सीट पर बैठने से पेल्विक फ्लोर को उचित सहारा नहीं मिलता, जिससे निचले हिस्से की नसों पर लगातार गुरुत्वाकर्षण और शरीर का खिंचाव बना रहता है। हालांकि इस पर सीधे वैज्ञानिक शोध अभी जारी हैं, लेकिन लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठने और बवासीर के बढ़ते मामलों के बीच गहरा संबंध पाया गया है।
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टॉयलेट सीट के चुनाव को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ अहम सलाह देते हैं। इंडियन टॉयलेट सीट में बैठने का तरीका स्वाभाविक रूप से ‘स्क्वाटिंग’ पोजिशन बनाता है, जिससे मलाशय का रास्ता सीधा रहता है और पेट साफ होने में बहुत कम जोर लगाना पड़ता है। इसके विपरीत वेस्टर्न टॉयलेट सीट पर 90 डिग्री के कोण पर बैठने से मल त्यागने में स्वाभाविक रुकावट आती है और दबाव ज्यादा बनता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वेस्टर्न टॉयलेट सीधे तौर पर नुकसानदेह है, लेकिन इंडियन सीट पाचन और उत्सर्जन के लिहाज से ज्यादा प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। यदि आपके घर में वेस्टर्न टॉयलेट ही मौजूद है, तो डॉक्टर एक आसान उपाय सुझाते हैं कि शौच के वक्त पैरों के नीचे 6 से 7 इंच का छोटा स्टूल रख लें। इससे पैरों का कोण 35 डिग्री पर आ जाता है, जो बिल्कुल देसी टॉयलेट जैसी स्क्वाटिंग पोजिशन बना देता है और पेट बिना किसी जोर-जबरदस्ती के आसानी से साफ हो जाता है।



