कुलपति के औचक निरीक्षण से स्टाफ में मचा हड़कंप
सेंफई विश्वविद्यालय के केंद्रीय भंडार का कुलपति ने किया निरीक्षण

सैफई,इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय,सैफई में उपलब्ध प्रत्येक संसाधन का पारदर्शी,सुव्यवस्थित एवं जनहित में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कुलपति प्रो.डॉ.अजय सिंह निरंतर सक्रिय हैं। इसी क्रम में उन्होंने विश्वविद्यालय के केंद्रीय भंडार (सेंट्रल स्टोर) का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सामग्री, स्टॉक की प्रविष्टियों, मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति,भंडारण व्यवस्था तथा उपयोग में लाई जा रही एवं लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी सामग्रियों की स्थिति का गहनता से जायजा लिया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव दीपक वर्मा भी उनके साथ उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान कुलपति और कुलसचिव ने स्टॉक रजिस्टर, मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति और मांग के अनुरूप वितरण व्यवस्था का बारीकी से लिया जायजा,अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव के दिए निर्देश।
निरीक्षण के दौरान कुलपति ने स्टॉक रजिस्टर एवं अन्य अभिलेखों का बारीकी से अवलोकन किया तथा भंडार में दर्ज सामग्री और वास्तविक उपलब्ध स्टॉक के बीच समानता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने यह भी जानकारी प्राप्त की कि विभिन्न विभागों की मांग के अनुरूप मेडिकल उपकरणों एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति किस प्रकार की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने भंडारण क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए उपलब्ध स्थान के समुचित उपयोग,सामग्री के सुरक्षित रखरखाव और लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी वस्तुओं की पहचान कर उनके उचित उपयोग की संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिए।
कुलपति प्रो.डॉ.अजय सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध किसी भी संसाधन की अनावश्यक बर्बादी नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक वस्तु का उपयोग उसकी आवश्यकता और उपयोगिता के अनुसार किया जाए तथा विभागों की मांग एवं उपलब्ध आपूर्ति के बीच उचित सामंजस्य बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि संसाधनों का उचित आकलन,समयबद्ध आपूर्ति और नियमित निगरानी ही बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की आधारशिला है।
उन्होंने केंद्रीय भंडार के कर्मचारियों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी स्टॉक रजिस्टर,आपूर्ति विवरण, मांग पत्र,वितरण संबंधी अभिलेख एवं अन्य आवश्यक रिकॉर्ड स्पष्ट, अद्यतन और सुव्यवस्थित तरीके से संधारित किए जाएं,ताकि किसी भी सामग्री की उपलब्धता, निकासी एवं उपयोग का विवरण आसानी से प्राप्त किया जा सके। साथ ही उन्होंने निरीक्षण के दौरान उपस्थित संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए कि भंडार से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि की जानकारी व्यवस्थित रूप से रखी जाए और भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा संसाधनों की बर्बादी की स्थिति उत्पन्न न हो।
कुलपति ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह भी निर्देशित किया कि भंडार प्रबंधन में नियमित निगरानी,जवाबदेही और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। विश्वविद्यालय के संसाधन सार्वजनिक हित और मरीजों की बेहतर चिकित्सा सेवाओं के लिए हैं,इसलिए उनका प्रत्येक स्तर पर विवेकपूर्ण एवं आवश्यकता आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।



