सुबह उठते ही सूज जाते हैं हाथ और उंगलियां; मामूली न समझें, इन 5 गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत

Swollen Hands Causes in Hindi: सुबह सोकर उठने के बाद यदि आपको अपनी उंगलियों में भारीपन, कसाव या हाथों में असामान्य सूजन नजर आती है, तो इसे केवल सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करना बड़ी भूल साबित हो सकता है।

आमतौर पर बहुत अधिक गर्मी, ज्यादा सोडियम युक्त भोजन, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में हाथ रखकर लेटने या अचानक ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से हाथों में अस्थाई सूजन आना सामान्य माना जाता है। हालांकि, यदि यह समस्या अक्सर दोहराई जा रही है या काफी देर तक बनी रहती है, तो यह शरीर के अंदरूनी अंगों में किसी बड़ी गड़बड़ी का चेतावनी संकेत हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह लक्षण शरीर में फ्लूड रिटेंशन, रूमेटाइड अर्थराइटिस, थायरॉइड असंतुलन, किडनी की खराबी या हृदय संबंधी गंभीर दिक्कतों से सीधे जुड़े हो सकते हैं।

क्या अधिक नमक का सेवन हाथों को फुला देता है?

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के चिकित्सकीय आंकड़ों के मुताबिक, खानपान में अतिरिक्त नमक (सोडियम) का इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक जल संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है। जब खून में सोडियम का स्तर तय सीमा से अधिक बढ़ता है, तो शरीर पानी को बाहर निकालने के बजाय कोशिकाओं और ऊतकों में जमा (रिटेन) करने लगता है। इसी प्रक्रिया को फ्लूड रिटेंशन कहा जाता है, जिसके चलते सुबह के समय उंगलियों, हथेलियों और टखनों में सूजन साफ दिखाई देने लगती है। इसके अलावा एक ही करवट या पोजीशन में घंटों हाथ मोड़कर सोने से भी लिम्फ और रक्त का संचार बाधित होता है, जिससे बांहों और हाथों में तरल जमा हो जाता है।

हाथों में सूजन आने के 5 बड़े कारण और अंदरूनी संकेत

1. फ्लूड रिटेंशन (एडिमा): जब शरीर के नाजुक टिश्यूज के भीतर सामान्य मात्रा से अधिक तरल पदार्थ ठहर जाता है, तो हाथ और उंगलियां फूली हुई दिखाई देने लगती हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, कई बार सूजी हुई जगह को अंगूठे से 4-5 सेकंड दबाने पर वहां हल्का गड्ढा बन जाता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘पिटिंग एडिमा’ कहा जाता है। दवाओं के साइड इफेक्ट, हार्मोनल असंतुलन या गलत लाइफस्टाइल इसके प्रमुख ट्रिगर्स होते हैं।

2. रूमेटाइड अर्थराइटिस (गठिया): यदि हाथों की सूजन के साथ सुबह उठते ही उंगलियों या कलाई के जोड़ों में तेज दर्द, अकड़न और मुट्ठी बंद करने में दिक्कत महसूस होती है, तो यह गठिया का सीधा लक्षण हो सकता है। मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोइम्यून बीमारी रूमेटाइड अर्थराइटिस में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से जोड़ों की आंतरिक परत पर हमला करने लगता है, जिससे जोड़ों में जलन, दर्द और दीर्घकालिक सूजन पैदा हो जाती है।

3. अंदरूनी मोच या लिगामेंट इंजरी: हाथों पर कोई भारी वजन उठाने, अचानक झटका लगने या कलाई मुड़ जाने से अंदरूनी टिश्यूज डैमेज हो जाते हैं। नेशनवाइड चिल्ड्रन्स के विशेषज्ञों के मुताबिक, चोट लगने पर प्रभावित हिस्से के आसपास अचानक इन्फ्लेमेशन और फ्लूड जमा होने लगता है, जिससे उस जगह पर लाली, गर्माहट, तेज दर्द और हाथ हिलाने में असमर्थता जैसे लक्षण उभर आते हैं।

4. किडनी की फिल्टर क्षमता में गिरावट: अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ किडनी पेशेंट्स के अनुसार, गुर्दे शरीर से अतिरिक्त पानी, अपशिष्ट और गैर-जरूरी लवणों को छानकर पेशाब के रास्ते बाहर निकालते हैं। जब किडनी की फिल्टर करने की क्षमता धीमी होती है, तो शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकल पाता। नतीजा यह होता है कि अतिरिक्त सोडियम और पानी टिश्यूज में रिसने लगता है, जिससे हाथों के साथ-साथ चेहरे, आंखों के नीचे और पैरों में लगातार सूजन दिखने लगती है।

5. हार्ट पंपिंग में कमजोरी: अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का मानना है कि जब दिल पूरे सामर्थ्य के साथ रक्त को आगे पंप नहीं कर पाता, तो नसों में दबाव बढ़ जाता है और तरल पदार्थ फेफड़ों व दूरवर्ती अंगों में ठहरने लगता है। यदि हाथों की सूजन के साथ पैरों के पंजों में भारीपन, थोड़ी दूर चलने पर सांस फूलना, असामान्य थकान या रात में लेटते ही खांसी व दम घुटने जैसा अहसास हो, तो इसे कार्डियक अरेस्ट या हार्ट फेलियर की शुरुआती चेतावनी मानकर तुरंत जांच करानी चाहिए।

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कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना है जरूरी?

हाथों में कभी-कभार होने वाली हल्की सूजन ज्यादा काम या नमक की वजह से हो सकती है, जो थोड़ी देर में अपने आप सामान्य हो जाती है। लेकिन अगर हाथों के साथ सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में भारीपन महसूस हो, जोड़ों में लालिमा के साथ तेज जलन हो या सूजन कई दिनों तक लगातार बनी रहे, तो बिना घरेलू नुस्खों में समय गंवाए विशेषज्ञ फिजिशियन, नेफ्रोलॉजिस्ट या रूमेटोलॉजिस्ट से जांच करवाना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

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