मंदिर के कपाट खुले तो बजरंगबली के चरणों में मिले 4 लड्डू और नारियल, श्रद्धालुओं में आस्था का माहौल

संकट मोचन हनुमान मंदिर में सामने आई घटना; पुराने मंदिरों के संरक्षण का भी दिया संदेश

गाजियाबाद,। डायमंड फ्लाईओवर के पास पांडव नगर स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में 30 अगस्त की सुबह कपाट खुलने के बाद बजरंगबली की प्रतिमा के चरणों के पास चार बेसन के लड्डू और एक नारियल मिलने की घटना सामने आई। घटना की जानकारी मिलते ही मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था और भावनात्मक माहौल देखने को मिला।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 29 अगस्त की शाम आरती और पूजा के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। उस समय मंदिर में श्रद्धालु जितेंद्र कुमार गर्ग और संत कुमार मित्तल, निवासी लैंडक्राफ्ट गोल्फ लिंक सोसायटी, सहित अन्य भक्त मौजूद थे। इसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।

अगली सुबह मंदिर के कपाट खोले गए तो बजरंगबली की प्रतिमा के चरणों के पास चार बेसन के लड्डू और एक नारियल दिखाई दिए। घटना की जानकारी मिलने पर सुबह मौजूद श्रद्धालुओं ने प्रसाद को श्रद्धा के साथ ग्रहण किया। बाद में प्रसाद को अन्य भक्तों के बीच भी वितरित किया गया। यह घटना श्रद्धालुओं के बीच आस्था का विषय बनी हुई है।

पुराने मंदिरों के संरक्षण का आह्वान

इस अवसर पर क्राउड फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी अरबिंद कुमार सिंह ने कहा कि समाज को केवल नए मंदिरों के निर्माण पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि पुराने और उपेक्षित मंदिरों के संरक्षण की भी जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में पुराने मंदिर उचित देखरेख के अभाव में उपेक्षित हो रहे हैं। मंदिर केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति, परंपरा और आने वाली पीढ़ियों की पहचान हैं। इनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

अरबिंद कुमार सिंह ने समाज से अपील की कि लोग अपने आसपास स्थित पुराने और उपेक्षित मंदिरों की पहचान कर उनकी स्वच्छता, सुरक्षा, जीर्णोद्धार और नियमित पूजा-अर्चना में सहयोग करें।

42 वर्षों से आस्था का केंद्र है संकट मोचन मंदिर

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर लगभग 42 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। समय के साथ मंदिर की इमारत को मरम्मत और नवीनीकरण की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद क्राउड फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट ने मंदिर के नवीनीकरण एवं जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी उठाई।

ट्रस्ट की ओर से मंदिर में आवश्यक नवीनीकरण एवं सुधार कार्य कराए गए, जिनका समापन 21 जुलाई 2025 को हुआ। ट्रस्ट का कहना है कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण केवल पूजा-पाठ तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह आस्था, संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का सामूहिक प्रयास है।

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