‘PDA में A का मतलब Asaduddin Owaisi’, AIMIM प्रवक्ता का बड़ा दावा; क्या अखिलेश-ओवैसी आएंगे साथ

Owaisi Akhilesh Yadav alliance: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कूटनीतिक हलचल और बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी (SP) के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है।
शादाब चौहान ने कहा कि यदि अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनना है, तो उन्हें बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी का साथ लेना ही पड़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब तक पीडीए में ‘ए’ का अर्थ ‘असदुद्दीन ओवैसी’ नहीं होगा, तब तक सत्ता की राह आसान नहीं हो सकती।
‘बराबर की हिस्सेदारी और आजाद लीडरशिप’: AIMIM का सपा पर सीधा वार
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि 34 सालों के भरोसे के बाद अब मुस्लिम समाज केवल वोट बैंक बनने के बजाय राजनीतिक हिस्सेदारी चाहता है। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव की कुर्सी लगेगी, तो ओवैसी की भी कुर्सी लगेगी। मुस्लिम समाज को अब अपनी एक आजाद और मजबूत राजनीतिक लीडरशिप चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि चार बार सरकार बनाने में मदद करने के बाद अब पांचवीं बार के लिए सपा को मुसलमानों की वास्तविक राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
ओवैसी का खुला रुख: सपा, बसपा या चंद्रशेखर के साथ गठबंधन के विकल्प
इस बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी गठबंधन को लेकर अपने सभी विकल्प खुले रखे हैं। ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि वे उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए तैयार हैं, चाहे वह समाजवादी पार्टी हो, बहुजन समाज पार्टी (BSP) हो या चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी (ASP)। 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के जरिए 26 सीटों पर गठबंधन की चर्चाएं चली थीं, हालांकि बात नहीं बन सकी थी। बिहार के सीमांचल में 5 सीटें जीतने के बाद एआईएमआईएम के हौसले बुलंद हैं और पार्टी यूपी में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी है।
मुस्लिम वोट बैंक का गणित: सपा का दबदबा और संभावित चुनौतियां
अगर चुनावी आंकड़ों की बात करें तो 2022 के विधानसभा चुनाव में सीएसडीएस (CSDS) के अनुसार, समाजवादी पार्टी को करीब 79% मुस्लिम वोट मिले थे, जबकि 40% से अधिक मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में यह आंकड़ा 90% तक पहुंच गया था।
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वर्तमान में मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद सपा बनी हुई है। हालांकि, अगर बसपा मजबूती से लड़ती है या सपा-कांग्रेस गठबंधन में दरार आती है, तो मुस्लिम वोटों का बिखराव हो सकता है। ऐसे समीकरणों के बीच ‘जय भीम-जय मीम’ का संभावित गठबंधन या इंडिया ब्लॉक में ओवैसी की भूमिका यूपी के 2027 के सियासी संग्राम को बेहद दिलचस्प बना सकती है।



