बड़ी राहत: इन 4 राज्यों में लागू हुआ नया नियम, अब आपदा के समय नहीं देना होगा कोई किराया

Model Tenancy Act 2021 Details: कुदरत का कहर केवल घरों और इमारतों को ही नुकसान नहीं पहुंचातीं बल्कि किराये के मकानों में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी भी अचानक बदल देती हैं। बाढ़, भूकंप, तूफान या आग लगने जैसी घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब आगे क्या होगा। क्या किराया देना जारी रहेगा? अगर घर रहने लायक नहीं बचा तो क्या एग्रीमेंट खत्म किया जा सकता है? सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिलेगा या नहीं? ऐसे हर सवाल का जवाब भारतीय कानून में मौजूद है।

किन कानूनों से मिलती है सुरक्षा?

देश में किरायेदारों और मकान मालिकों के अधिकार तय करने के लिए मुख्य रूप से दो कानून लागू होते हैं। पहला है ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 और दूसरा है मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 जिसे कई राज्यों ने अपनाया है। इन कानूनों में यह बताया गया है कि किसी प्राकृतिक आपदा के बाद दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां क्या होंगी।

कब खत्म की जा सकती है किराये की लीज?

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 108(B)(e) के अनुसार यदि आग, बाढ़, तूफान, भीड़ की हिंसा या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा से किराये की संपत्ति इतनी क्षतिग्रस्त हो जाए कि उसमें रहना संभव न रहे तो किरायेदार चाहे तो लीज समाप्त मान सकता है। हालांकि यह सुविधा तभी मिलेगी जब नुकसान के लिए किरायेदार जिम्मेदार न हो।

यह कानून पूरे भारत में लागू होता है। मगर जिन राज्यों में अलग रेंट कंट्रोल या टेनेंसी कानून प्रभावी हैं वहां उनके नियम प्राथमिकता रखते हैं।

क्या आपदा आते ही रेंट एग्रीमेंट खत्म हो जाता है?

ऐसा नहीं है। प्राकृतिक आपदा के बाद रेंट एग्रीमेंट अपने आप समाप्त नहीं होता। अंतिम फैसला किरायेदार का होता है। यदि वह उसी मकान में रहना जारी रखता है तो उसे तय किराया देना होगा। वहीं अगर नुकसान बहुत अधिक है और मकान रहने योग्य नहीं बचा है तभी लीज समाप्त करने का अधिकार लागू होता है। मामूली या आसानी से ठीक होने वाले नुकसान की स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा।

मॉडल टेनेंसी एक्ट देता है अतिरिक्त राहत

मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 किरायेदारों को ज्यादा स्पष्ट सुरक्षा प्रदान करता है। यह कानून उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और असम जैसे राज्यों में लागू किया जा चुका है।

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इस कानून की धारा 15(6) कहती है कि यदि प्राकृतिक आपदा के कारण मकान रहने योग्य नहीं रह जाता तो मकान मालिक तब तक किराया नहीं मांग सकता जब तक मरम्मत पूरी करके घर को फिर से रहने लायक न बना दिया जाए।

सिक्योरिटी डिपॉजिट कब लौटाना होगा?

अगर मकान की मरम्मत संभव नहीं है या वह रहने लायक नहीं बचता तो नोटिस अवधि पूरी होने के 15 दिनों के भीतर मकान मालिक को किरायेदार का पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट और अग्रिम किराया वापस करना होगा। हालांकि यदि किरायेदार पर कोई बकाया या कानूनी देनदारी है तो उसकी राशि काटी जा सकती है।

एग्रीमेंट खत्म होने पर भी मिलेगी एक महीने की राहत

मॉडल टेनेंसी एक्ट की धारा 5(3) के तहत यदि किसी किरायेदार का निश्चित अवधि वाला रेंट एग्रीमेंट आपदा के दौरान समाप्त हो जाता है तो उसके अनुरोध पर मकान मालिक को एक महीने तक उसी शर्तों पर मकान में रहने देना होगा। यह अवधि आपदा समाप्त होने के बाद गिनी जाएगी।

इमरजेंसी में बिना नोटिस भी हो सकता है प्रवेश

आमतौर पर मकान मालिक को मरम्मत के लिए घर में आने से पहले 24 घंटे पहले सूचना देनी होती है। मगर यदि प्राकृतिक आपदा या कोई आपात स्थिति हो तो यह नियम लागू नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में मकान मालिक बिना पूर्व सूचना के भी घर में प्रवेश कर सकता है ताकि जरूरी मरम्मत या सुरक्षा से जुड़े काम किए जा सकें।

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