सेंसर बोर्ड का लगा बैन और 6 साल तक तरसती रही रिलीज को; बोल्ड सीन्स और धार्मिक रार में फंसी थी बॉलीवुड की ये फिल्म

Rang Rasiya movie controversy: बॉलीवुड में हर साल कई फिल्में रिलीज होती हैं। कुछ फिल्में अपनी कहानी से पहचान बनाती हैं तो कुछ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर जाती हैं। ऐसी ही एक फिल्म थी ‘रंग रसिया’ जिसे बनने के बाद दर्शकों तक पहुंचने में पूरे छह साल लग गए। लंबे समय तक सेंसर बोर्ड की आपत्तियां और कई तरह के विरोध इसकी राह में सबसे बड़ी बाधा बने रहे।
विवादों के कारण देर से पहुंची सिनेमाघरों तक
केतन मेहता के निर्देशन में बनी ‘रंग रसिया’ साल 2008 में तैयार हो चुकी थी। हालांकि कई कारणों से इसे तत्काल रिलीज की मंजूरी नहीं मिली। आखिरकार यह फिल्म 7 नवंबर 2014 को सिनेमाघरों में रिलीज हो सकी। इस पीरियड ड्रामा में रणदीप हुड्डा मुख्य भूमिका में नजर आए और उनके अभिनय की काफी चर्चा हुई।
सेंसर बोर्ड को किन बातों पर थी आपत्ति
फिल्म मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन और उनकी कला से प्रेरित है। इसमें कई बोल्ड दृश्य दिखाए गए थे जिन पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने आपत्ति जताई। इसी वजह से फिल्म लंबे समय तक अटकी रही। मेकर्स इसे हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई अन्य भाषाओं में भी रिलीज करना चाहते थे मगर हालात ऐसे बने कि यह योजना पूरी नहीं हो सकी।
कलाकार की सोच और समाज के टकराव की कहानी
फिल्म में रणदीप हुड्डा ने एक ऐसे चित्रकार का किरदार निभाया है जो अपनी कला को समाज की पुरानी सोच से ऊपर रखता है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे वह देवी-देवताओं की तस्वीरों को आम लोगों तक पहुंचाने का काम करता है। उस समय समाज में ऊंच-नीच की सोच गहरी थी और हर किसी को धार्मिक प्रतीकों तक समान पहुंच नहीं थी। इसी सोच को चुनौती देने के कारण उसके सामने कई मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं।
बोल्ड दृश्यों ने बढ़ाया विवाद
फिल्म में रणदीप हुड्डा और नंदना सेन के बीच कई अंतरंग दृश्य फिल्माए गए हैं। इन्हीं दृश्यों और कुछ पेंटिंग्स के चित्रण को लेकर विवाद और बढ़ गया। कहानी में यह भी दिखाया गया है कि चित्रकार अपने मॉडल के साथ निजी रिश्ते बना लेता है। इसके बाद समाज उसके खिलाफ खड़ा हो जाता है। उस पर संस्कृति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते हैं और उसका प्रिंटिंग प्रेस तक जला दिया जाता है।
धार्मिक भावनाओं को लेकर भी हुआ विरोध
फिल्म के कुछ पोस्टर और दृश्य कई संगठनों के निशाने पर आ गए। आरोप लगाया गया कि इनमें हिंदू देवी-देवताओं को आपत्तिजनक तरीके से दिखाया गया है। इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुए और अदालत तक मामला पहुंचा। कई लोगों का कहना था कि फिल्म धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। यही वजह रही कि इसकी रिलीज लगातार टलती रही।
रणदीप हुड्डा ने क्या कहा था
रणदीप हुड्डा ने IANS से बातचीत में कहा था कि यह फिल्म शुरू से ही विवादों में रही और सेंसर से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए मजबूत साझेदारी की जरूरत थी और बाद में पेन मूवीज के साथ जुड़ने से यह संभव हो पाया।
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रणदीप का यह भी कहना था कि फिल्म पुरानी जरूर हो चुकी थी मगर उन्हें नहीं लगता कि देरी से इसकी अहमियत कम हुई। उनके मुताबिक किसी भी फिल्म को लेकर होने वाली चर्चा दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाती है और इससे फिल्म को फायदा भी मिलता है।



