अखिलेश यादव का वो बयान जिसने भाजपा की नींद उड़ा दी, बढ़ी बीजेपी की बेचैनी

राजनीति में प्रतिद्वंदी को मात देने के लिए लुभावने ऑफर की पेशकश का चलन अक्सर देखने को मिलता है। दांव चल जाए तो वारे के न्यारे, वरना नुकसान की कोई गुंजाइश नहीं होती। एक-दूसरे के दल में सेंधमारी की कोशिश निरंतर चलती रहती हैं।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया है। जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आकर्षक ऑफर से सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अखिलेश का यह ऑफर सिर्फ सात दिन के लिए मान्य है। यूपी में भाजपा और सपा के बीच की अदावत जगजाहिर है।

सपा ने बढ़ाई बीजेपी की बेचैनी

मौका मिलने पर दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे की टांग खींचने का भरसक प्रयास करते हैं। इस बार सपा ने भाजपा को बेचैन करने का दांव चला है। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर गए हैं। सीएम की यात्रा के मद्देनजर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बयान दिया है कि जो भी सौ विधायक लेकर आएगा, उसे सीएम बना लिया जाएगा।

उन्होंने सूबे के दोनों डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य का नाम लिए बगैर सीधे संकेत देकर कहा कि आज जब सीएम विदेश यात्रा पर हैं तो हम यह मौका दे रहे हैं कि सौ एमएलए को लेकर आओ और मुख्यमंत्री बन जाओ। सपा मुखिया पूर्व में भी इस प्रकार का आमंत्रण दे चुके हैं। सपा ने सीएम की विदेश यात्रा पर भी तंज कसा है। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा ने विस चुनाव की तैयारियां आरंभ कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरठ कार्यक्रम को भाजपा के चुनावी शंखनाद के नजरिए से देखा गया है।

देश के सबसे बड़े राज्य उप्र में 2017 में भाजपा की ऐसी आंधी चली थी, जिसने विपक्ष को उखाड़ फेंका था। पिछले नौ साल में इस राज्य में सपा-बसपा का जनाधार कम होता गया। मतदाताओं ने भाजपा पर भरोसा जताकर क्षेत्रीय दलों के सपनों को चकनाचूर कर दिया। यूपी में कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) का दबदबा नगण्य है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में सपा हमलावर

अखिलेश यादव की तरफ से भाजपा के दोनों डिप्टी सीएम को सीएम बनने का ऑफर दिए जाने के पीछे की एक बड़ी वजह भी बताई जाती है। दरअसल सीएम योगी आदित्यनाथ तथा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक के मध्य तनातनी की खबरें जब-तब सामने आती रही हैं। हालांकि इन खबरों में दम नहीं रहा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में भी सपा ने हमलावर रुख अपना रखा है।

विवादों में घिरे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती निरंतर सीएम योगी पर जुबानी हमला कर रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानंद के कुछ शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा बदसलूकी किए जाने के मामले को शांत कराने के लिए हाल ही में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को आगे आना पड़ा था। उन्होंने कुछ ब्राह्मणों की पूजा-अर्चना की थी। इसके पहले वह यह बयान दे चुके हैं कि किसी ब्राह्मण की चोटी खींचना उचित नहीं है। ऐसा करने वाले पुलिसकर्मियों को पाप का भागीदार बनना पड़ेगा। वैसे सियासत में योगी आदित्यनाथ ने अपना कद काफी ऊंचा कर लिया है।

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सीएम पद की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ वह तेजी से आमजन के मध्य लोकप्रिय होते चले गए हैं। इसमें दो राय नहीं कि वर्तमान में भाजपा में मोदी के बाद योगी के नाम की चर्चाएं होती हैं। उन्हें अगले पीएम के तौर पर भी देखा जाने लगा है। जबकि सपा को सबसे ज्यादा चिढ़ योगी आदित्यनाथ से होती है।

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