अजित पवार ही नहीं इन 7 नेताओं की भी प्लेन क्रैश में हो चुकी है मौत

एक और विमान हादसा…। एक और राजनेता की दुखद मौत…। एक और जांच का आदेश…। देश में यह सिलसिला निरंतर चल रहा है। ना पहले कुछ बदला था, ना आगे कुछ बदल पाएगा। हवाई सफर में सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती। तकनीक कब धोखा दे जाए, कोई नहीं जानता। हवाई यात्रा कब जीवन की अंतिम यात्रा बन जाएगी, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।

देश में वीआईपी व्यक्ति अक्सर निजी प्लेन का इस्तेमाल करते हैं। खासकर राजनेताओं को निजी प्लेन ज्यादा रास आते हैं। सीमित सीट के इन प्लेन को कम दूरी की यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। राजनेताओं की दिनचर्या का व्यस्त होती है। खासकर चुनावी मौसम में उन्हें दिनभर भागम-भाग करनी पड़ती है। ऐसे में निजी विमान कंपनियों की सेवाएं ली जाती हैं।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की प्लेन हादसे में मौत की खबर वाकई चिंताजनक है। इस घटना ने समूचे महाराष्ट्र को स्तब्ध कर दिया है। मुंबई से महाराष्ट्र लौटते समय वह जानलेवा हादसे का शिकार हो गए। महाराष्ट्र की सियासत में अजित पवार बड़ा नाम थे। समर्थक उन्हें ‘दादा’ के नाम से संबोधित करते थे। एनसीपी चीफ अचानक दुनिया छोड़कर चले जाएंगे, यह तो उनके राजनीतिक विरोधियों ने भी सपने में नहीं सोचा होगा। उनके आकस्मिक निधन से पीड़ित परिवार और समर्थक शोकातुर हैं।

राज्य की सियासत को भी अपूर्णीय क्षति पहुंची है। मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश लिए अजित पवार सब कुछ छोड़कर चले गए। सीएम पद पर बैठने का उनका सपना पूरा नहीं हो पाया। प्लेन हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जल्द जांच रिपोर्ट सामने आ जाएगी, मगर दुर्घटना में जो चले गए, वह अब लौटकर नहीं आएंगे। जिस कंपनी के प्लेन में अजित पवार सवार थे, उसी कंपनी की सेवाएं अधिकांश राजनेता लेते रहे हैं। इसके बावजूद प्लेन में तकनीकी खराबी आना सवाल खड़े करता है।

किन नेताओं की हो चुकी है सड़क हादसे में मौत

देश में विमान हादसों का पुराना इतिहास रहा है। इन हादसों में कई नामचीन व्यक्तियों और राजनेताओं की जान जा चुकी है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी, तेलुगु देशम पार्टी के नेता जीएमसी बालयोगी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया, आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी, अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दोरजी खांडू, भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी आदि भी विमान हादसों की वजह से असमय मौत के मुंह में समा गए थे।

इसी कड़ी में अगला नाम अजित पवार का जुड़ गया है। प्लेन हादसे लैंडिंग और टेक ऑफ के वक्त ज्यादा होते हैं। इसे फ्लाइट का सबसे अहम समय माना जाता है। दरअसल लैंडिंग और टेक ऑफ के दौरान प्लेन कम ऊंचाई पर होता है। ऐसे में किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए समय कम होता है। जब प्लेन कई हजार फीट पर उड़ता है तो उस समय पायलट के पास काफी समय होता है।

जानें कितनी संपत्ति पीछे छोड़ गए अजित पवार

यदि दोनों इंजन बंद भी हो जाएं, तो भी प्लेन अचानक आसमान से नीचे नहीं गिरेगा। यह एक ग्लाइडर बन जाता है और पायलट कुछ ना कुछ कर लेते हैं, मगर लैंडिंग या टेकऑफ के वक्त स्थिति अलग होती है। बहरहाल विमान हादसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। हवाई सफर को सुरक्षित बनाना होगा। अन्यथा इस तरह का सिलसिला नहीं थम पाएगा। किसी हादसे के बाद लकीर को पीटने की आदत को भी छोड़ना पड़ेगा।

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