यमुना एक्सप्रेस-वे बना ‘यमराज’ का द्वार, सिस्टम फेल या हम लापरवाह; जानें कैसे हो रहे हैं हादसे
यमुना एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसे की खबर ने हर किसी के दिल को भीतर तक झकझोर दिया है। आग की लपटों में घिरे वाहन और सड़क पर चादर में लिपटे शवों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों से हादसे की भयावहता का अंदाजा सहज लग जाता है। हादसे में जान गंवा चुके यात्रियों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। किस्मत से जिन यात्रियों की जान बच गई है, वह ताउम्र इस घटना को भूल नहीं पाएंगे। घने कोहरे के दरम्यान आग का गोला बने वाहनों में फंसे यात्रियों की दशा कैसी रही होगी, यह सोचकर भी दिल कांप उठता है।
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर यह भयानक हादसा वाकई विचलित कर रहा है। सर्दी के मौसम में घना कोहरा छाने पर इस एक्सप्रेस-वे पर जानलेवा हादसा होना कोई नई बात नहीं है। यह सिलसिला हर साल की कहानी है। इसके बावजूद दुर्घटनाएं रोकने के लिए कोई प्रभावी सिस्टम तैयार न होना सवाल खड़े करता है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर दृश्यता शून्य होने पर वाहन चलाना जोखिम भरा होता है। फिर भी जान को जोखिम में डालकर नागरिक सड़क मार्ग से यात्रा करने निकल पड़ते हैं। किस्मत और भगवान भरोसे यह सफर अक्सर दुखदायी साबित होता है।
सुरक्षित यात्रा की कोई गारंटी नहीं
पिछले कुछ दिनों से सर्दी का प्रकोप बढ़ गया है। शाम ढलने पर घना कोहरा छाने लगता है। शून्य दृश्यता के चलते जब पैदल चलना मुश्किल होता है तब वाहन से लंबा सफर करना समझदारी नहीं हो सकती। यमुना एक्सप्रेस-वे ने बेशक यात्रा की दूरी एवं समय को कम किया है, मगर कोहरे में सुरक्षित यात्रा की कोई गारंटी नहीं होती। एक्सप्रेस-वे पर हल्के एवं भारी वाहनों के लिए गति सीमा निर्धारित है, मगर अधिकांश चालक गंतव्य पर जल्द से जल्द पहुंचने की लालसा में गति सीमा को नजरअंदाज करने से बाज नहीं आते। वाहन चालकों को लगता है कि कोहरे में न कोई यातायात कर्मी रोकेगा, न कैमरे की नजर में आ पाएंगे। हादसे रोकने को यातायात पुलिस समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती है।
सख्ती के बाद भी तोड़ते हैं नियम
यातायात नियमों की अनदेखी होने पर वाहन का चालान किया जाता है। हालांकि इसके सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ पाते हैं। सोशल मीडिया पर हाल ही में दुबई के एक चौराहे का वीडियो वायरल हुआ है। वायरल वीडियो तड़के चार बजे का है। लाल बत्ती होने पर चौराहे पर सन्नाटा पसरा है। इस बीच तेज रफ्तार कार आकर वहां रूकती है। चौराहे के आसपास कोई और वाहन न होने के बाद भी वाहन चालक ग्रीन सिग्नल होने का इंतजार करता है। यह वीडियो दुबई में यातायात नियमों के प्रति वाहन चालकों की समझदारी का उदाहरण मात्र है। इसके उलट भारत में स्थिति बेहद खराब है।
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भारत में व्यस्त चौराहे पर लालबत्ती के दौरान कुछ वाहन चालक चंद सेकंड का सब्र रखने को तैयार नहीं होते। वह रेडलाइट को जंप कर भागने की फिराक में रहते हैं। देश में जोखिम पूर्ण यह कारस्तानी सिर्फ चौराहों पर नजर नहीं आती बल्कि कुछ शूरवीर तो रेलवे क्रॉसिंग पर भी अपनी बहादुरी दिखाने के चक्कर में जान गंवा बैठते हैं। दरअसल यातायात नियमों का पालन न करने की यह बुरी आदत बचपन से सीख ली जाती है। बच्चे जब अपने किसी परिचित के साथ दो पहिया या चार पहिया वाहन पर सवार होकर बाहर निकलते हैं तो वह सड़कों पर जगह-जगह ट्रैफिक नियमों को टूटते देखते हैं। बाद में वह खुद ऐसा करने लगते हैं।



