इंडिगो की विफलता: सरकार और यात्रियों की नाराजगी, क्या सॉरी से सब ठीक होगा

‘सॉरी’…गलती छोटी हो या बड़ी, दूसरे के गुस्से से बचने के लिए अंग्रेजी का यह शब्द ‘रामबाण’ माना जाता है। ‘सॉरी’ बोलकर अपनी गलती को स्वीकार करने के अलावा दूसरे की नाराजगी को कम किए जाने की कोशिश होती है। देशभर में यात्री विमान परिचालन का संकट गहराने पर इंडिगो ने ‘सॉरी’ बोलकर अपना पीछा छुड़ाने का प्रयास किया है। उड़ान सेवा बाधित होने से विभिन्न एयरपोर्ट के भीतर और बाहर अफरा-तफरी का आलम है।
संकट में फंसे यात्रियों के चेहरे पर निराशा और गुस्से के भाव बार-बार उभर रहे हैं। यात्रियों के पास इंडिगो को कोसने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। किसी को शादी समारोह में जाना है, कोई जॉब ज्वाइन करने के लिए घर से निकला है, किसी की अर्जेंट कारोबारी मीटिंग है, मगर गंतव्य पर समय पर न पहुंच पाने की पीड़ा हर किसी से जुड़ी है। पिछले तीन दिन से इंडिगो की विमान सेवाएं निरंतर धोखा दे रही हैं। अलग-अलग एयरपोर्ट पर यात्रियों का गुस्सा फूट रहा है। इंडिगो प्रशासन लाचार एवं बेबस नजर आता है।
सरकार ने इंडिगो को लगाई फटकार
बिगड़े हालात को देखकर केंद्र सरकार भी सक्रिय हुई है। सरकार ने इंडिगो को फटकार लगाई है, मगर इससे समस्या का फौरी समाधान संभव नहीं है। खबर है कि दस फरवरी से पहले विमानों का परिचालन सामान्य होने की कोई उम्मीद नहीं है। निश्चित रूप से मौजूदा संकट के लिए इंडिगो जिम्मेदार है। वह अपनी लापरवाही से मुंह नहीं फेर सकता। परेशान यात्रियों को इंडिगो के उन जवाबों से कोई लेना-देना नहीं, जिनमें विमान परिचालन की बाधाओं के पीछे का जिक्र है, उन्हें किराए के बदले समय पर सुविधाएं चाहिए। यह जरूरी भी है। यदि आप कोई दायित्व संभालते हैं तो उससे पीछे नहीं हट सकते हैं। इस मामले पर सियासत भी गर्म है।
जानें राहुल गांधी ने क्या कहा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद राहुल गांधी ने इंडिगो के साथ-साथ केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा है। राहुल गांधी ने कहा है कि इंडिगो की विफलता इस सरकार के ‘एकाधिकार मॉडल’ का नतीजा है। एक बार फिर इसकी कीमत आम भारतीयों को देरी, उड़ानें रद्द होने और लाचारी के रूप में चुकानी पड़ी है। उधर, इंडिगो इन दिनों क्रू मेंबर्स की भारी कमी का सामना कर रही है। नए एफडीटीएल नियम में फ्लाइट ड्यूटी की सीमा तय की गई है। नए नियमों के तहत पायलट के लिए साप्ताहिक विश्राम का समय बढ़ाया गया है।
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रात में विमानों के उतरने की संख्या सीमित की गई है ताकि उड़ान सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। हालांकि नए नियम सुरक्षित उड़ान को प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। सवाल यह कि क्या इंडिगो को नए नियमों के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो नए नियमों के लागू होने के बाद उत्पन्न होने वाली स्थिति का आकलन करने में क्या वह चूक गया?
सोशल मीडिया पर भारतीय यात्रियों की परेशानी खूब वायरल हो रही है। इससे देश की छवि को धक्का लगा है। यह भी गौर करने वाली बात है कि फिलवक्त रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर हैं। ऐसे में विमान परिचालन संकट पैदा होना अधिक गंभीर है। सरकार और इंडिगो को मिलकर इस समस्या का निदान करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। इस बीच कुछ विमान कंपनियों द्वारा किराए में अचानक वृद्धि कर देना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कंपनियां यात्रियों की मजबूरी का लाभ उठाने को आतुर हैं।



