Rabri Bungalow Row: अगर राबड़ी ने बंगला खाली नहीं किया तो क्या करेगी नीतीश सरकार
Rabri Bungalow Row: बिहार में चुनाव के बाद नई सरकार ने सरकारी बंगलों के आवंटन में बदलाव किया है, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
Rabri Bungalow Row: बिहार में चुनाव के बाद नई सरकार द्वारा सरकारी बंगलों के आवंटन को लेकर विवाद थमता हुआ नजर नहीं आ रहा। खासकर, जब से आरजेडी की प्रमुख नेता और विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी का बंगला बदलने का आदेश दिया गया है। सरकार का कहना है कि बंगलों के आवंटन में बदलाव किया जाएगा, मगर राबड़ी देवी ने इस फैसले का विरोध करते हुए बंगला खाली करने से साफ इनकार कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य सरकार ने सरकारी बंगलों के आवंटन का पुराना तरीका बदल दिया है। पहले, बंगलों का आवंटन नेताओं की हैसियत और उनके पद के आधार पर किया जाता था, मगर अब इसे बदलकर विधानसभा सीटों के नाम पर आवंटित किया जा रहा है। पटना के दरोगा राय पथ पर 44 एकड़ जमीन पर 243 नए एमएलए के बंगलों का निर्माण चल रहा है, जिनमें से हर बंगला एक विधानसभा सीट के नाम से अलॉट किया जाएगा।
राबड़ी देवी का नया बंगला और सरकार का नोटिस
राबड़ी देवी को विधान परिषद में विपक्ष की नेता के रूप में 39 होर्डिंग रोड पर एक नया बंगला आवंटित किया गया है, मगर उन्हें अब अपने पुराने बंगले 10 सर्कुलर रोड को खाली करने के लिए कहा गया है। भवन निर्माण विभाग ने उन्हें 3 महीने का नोटिस जारी किया है, जिसके तहत अगर बंगला नहीं खाली किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
आरजेडी का आरोप और राजनीति का तानाबाना
आरजेडी ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित करार दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि यह सब सिर्फ नीतीश कुमार के मोदी सरकार के करीब जाने की साजिश है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब नीतीश कुमार 20 साल से मुख्यमंत्री हैं, तो क्यों उन्हें अपने पुराने बंगले को खाली करने का आदेश नहीं दिया गया? मंडल का कहना था कि आरजेडी को 1 करोड़ से ज्यादा वोट मिले हैं, जबकि बीजेपी को 90 लाख से कम, और इसलिए पार्टी कमजोर नहीं है।
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लालू परिवार का जवाब
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्य भी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठे। तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “सुशासन बाबू का मॉडल लालू जी का अपमान कर रहा है” और यह तंज कसा कि “घर से निकाल दोगे तो दिल से कैसे निकाल पाओगे?” वहीं, उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने इसे घटिया राजनीति बताते हुए कहा कि कैसे सरकार बिहार के जनता के दिल से लालू परिवार को निकाल सकती है, जो हमेशा उनके दिलों में बसते हैं।
क्या होगा अगर राबड़ी देवी बंगला नहीं छोड़ेंगी?
अगर राबड़ी देवी पुराने बंगले को खाली करने से इंकार करती हैं, तो सरकार उनके खिलाफ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट 1971 के तहत कार्रवाई कर सकती है। इसके तहत पहले नोटिस दिया जाएगा, फिर उसे अनधिकृत घोषित किया जाएगा और अंत में जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस द्वारा बंगले से बेदखली की जाएगी। हालांकि, राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए यह माना जा रहा है कि सरकार सीधे कार्रवाई की बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करेगी।



