जब धर्मेंद्र को फिल्म निर्माताओं ने रिजेक्ट कर दिया था: हॉकी खिलाड़ी नहीं, हीरो चाहिए

आज भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने एक असल नायक को खो दिया है- धर्मेंद्र। वो अभिनेता जिसने बॉक्स ऑफिस की आंकड़ों के आगे नायकत्व को अपनी असली पहचान दी थी। उनका नाम आज भी फिल्म इंडस्ट्री में गहरे सम्मान के साथ लिया जाता है, क्योंकि उन्होंने सिनेमा में न केवल ग्लैमरस किरदार निभाए बल्कि एक सच्चे इंसान के रूप में भी अपने दिल की बातों को खुले दिल से साझा किया। रजत शर्मा के शो “आप की अदालत” में उनका इंटरव्यू आज भी लोगों के दिलों में ताजगी से गूंजता है।
धर्मेंद्र का दिल छूने वाला अनुभव
रजत शर्मा ने धर्मेंद्र से उनके बचपन के बारे में पूछा, तो उन्होंने बड़ी ही सादगी से अपने पिता के साथ बिताए गए दिनों को याद किया। धर्मेंद्र ने कहा कि मेरे पिता एक स्कूल टीचर थे, और वे बहुत अनुशासित थे। एक बार मैंने उनसे सोने के लिए कहा, तो उन्होंने मुझे पहाड़े सुनाने को कहा। मैं सोचने लगा, ‘मैं सोने आया हूं, मरने नहीं!’ यह छोटी-सी बात उनके कठोर लेकिन प्यार भरे पालन-पोषण को साफ तौर पर दिखाती है।
Dharmendra की मौत के बाद बेटी ईशा देओल रो पड़ीं, श्मशान से इमोशनल वीडियो
धर्मेंद्र ने अपनी पहली फिल्म ‘शहीद’ देखी, तो उनका दिल चुक गया। वह बोले, “मैंने सोचा, ये लोग कहाँ रहते हैं? मैं भी वहाँ जाना चाहता हूँ। शायद भगवान ने मेरी ईमानदारी को देखकर मुझे ये मौका दिया।” इसी लालसा के साथ, एक छोटे से पंजाबी घर से निकलकर वह मुंबई आ गए, लेकिन उनके पास न कोई पैसा था और न ही कोई ठिकाना। बस था तो एक सपना और उसे पूरा करने की जिद।
हमें हॉकी खिलाड़ी की नहीं, एक हीरो चाहिए
रजत शर्मा ने धर्मेंद्र से उनकी शुरुआती कठिनाइयों के बारे में पूछा। अभिनेता ने बताया कि शुरुआत में निर्माताओं ने उन्हें नकार दिया था, यहाँ तक कि उन्हें कुश्ती में लौटने की सलाह दी गई थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। धर्मेंद्र ने कहा कि मैंने लव इन शिमला के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया था। पहले उन्होंने मुझे देखा और कहा, ‘हमें एक हीरो चाहिए, हॉकी खिलाड़ी नहीं। इस वक्त की कड़वी सच्चाई ने उन्हें आत्म-सम्मान बनाए रखने का सिखाया। धर्मेंद्र का मानना था कि काम ही पूजा है और वह हमेशा काम को सर्वोपरि मानते थे।



