Tripuri Purnima 2025: इस दिन करें खास चीज का दान और पाएं शुभ फल
Tripuri Purnima 2025 का पर्व विशेष पूजा, व्रत और दान का समय है। जानें इस दिन की पूजा विधि, चंद्रमा के दर्शन का महत्व

Tripuri Purnima 2025: दीवाली से शुरू होकर त्रिपुरी पूर्णिमा तक का यह पर्व भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर माना जाता है। इस वर्ष त्रिपुरी पूर्णिमा 5 नवम्बर को है और 21 नवम्बर को देव दिवाली मनाई जाएगी। हर साल इस समय विशेष पूजा, व्रत और दान-पुण्य की परंपराएँ पूरे देश में मनाई जाती हैं। जानिए इस पर्व के महत्व, पूजा विधि और दान के महत्व को।
त्रिपुरी पूर्णिमा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व जानें
बता दें कि Tripuri Purnima को मनोरथ पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से चंद्रमा के पूजन से जुड़ा हुआ है, और धर्मबोध ग्रंथ में इसे लेकर विस्तृत उल्लेख मिलता है। ज्योतिर्भास्कर जयंत सालगांवकर के अनुसार, यह व्रत कार्तिक माह की पूर्णिमा से शुरू होता है। इस दिन चंद्रमा को पूजा में शामिल करना और उनके दर्शन करना एक विशेष महत्व रखता है। साथ ही, इस दिन महिलाएं अपने सौभाग्य की कामना करते हुए हल्दी और सौभाग्यवर्धक उपहार देती हैं।
नमक से चंद्र प्रतिमा बनाना: पारंपरिक पूजा का हिस्सा
ये व्रत मुख्य रूप से चंद्रमा की पूजा से जुड़ा हुआ है। कुछ विशेष परिवार इस दिन नमक से चंद्र प्रतिमा बनाते हैं और उसकी पूजा करते हैं, लेकिन यह कार्य कठिन और समयसापेक्ष होता है। हालांकि, यदि यह संभव न हो, तो इस दिन चंद्रमा के दर्शन करना और उसका मानसिक पूजन करना पर्याप्त माना जाता है। एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, जो लोग चंद्रमा का दर्शन करने में सक्षम हैं, उन्हें इस पर्व के महत्व का पूरा लाभ उठाना चाहिए।
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व्रत का मकसद क्या
कार्तिक माह की पूर्णिमा पर विशेष रूप से कुष्माण्ड व्रत का आयोजन किया जाता है। इस व्रत में कोहला बेल को लक्ष्मी-नारायण के रूप में पूजा जाता है और इसे सोलह चरणों में किया जाता है। पूजा के बाद विशेष मंत्रों का जाप और बेल को योग्य व्यक्तियों को दान में दिया जाता है। इस व्रत का उद्देश्य पापों का नाश करना और उत्तम संतान की प्राप्ति है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को शुभ मुहूर्त में करना चाहिए और इसके साथ ही बेल की देखभाल करना भी आवश्यक होता है।



