Satara Doctor Suicide Case: कटघरे में सिस्टम, अधिकारियों की खामियां उजागर

Satara Doctor Suicide Case: महाराष्ट्र में लेडी डॉक्टर खुदकुशी प्रकरण ने समूचे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर डॉक्टर को आखिरकार अपनी जान देनी पड़ गई। पीड़िता की शिकायतों पर न स्वास्थ्य विभाग और ना पुलिस ने ध्यान देना जरूरी समझा। कुछ व्यक्तियों की मनमानी को वह निरंतर सहन करती रही।
फर्जी फिटनेस सर्टीफिकेट जारी न करना, सिर्फ यह कसूर लेडी डॉक्टर का था। सर्टीफिकेट के लिए उन पर अनावश्यक दबाव डाला गया। अंजाम भुगतने की धमकी दी गई। पीड़िता के साथ चार बार बलात्कार किया गया। पुलिस कर्मियों के अलावा एक सांसद ने भी फोन पर डॉक्टर को धमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महाराष्ट्र के सतारा का यह मामला आज देशभर में चर्चाओं के केंद्र में है।
लेडी डॉक्टर की जिंदगी बन गई थी नर्क
सरकारी अस्पताल में संविदा पर कार्यरत लेडी डॉक्टर ने सुनहरे भविष्य के सपने देखे थे। जिन्हें पूरा करने के लिए वह कठिन परिश्रम करती रही। पुलिस द्वारा घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट से पता चलता है कि पीड़िता ने पिछले कुछ माह बेहद विकट परिस्थितियों में गुजारे थे। मकान मालिक के बेटे की दरिंदगी और महाराष्ट्र पुलिस के सब इंस्पेक्टर की मनमानी ने उसकी जिंदगी को नर्क से भी बदतर बना दिया था।
तनाव में घिरी पीड़िता बार-बार स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस के अधिकारियों से फरियाद करती रही, मगर किसी ने मदद करने की जहमत नहीं उठाई। जो अधिकारी अब इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कह रहे हैं, उन्हें आईने में अपना चेहरा जरूर देखना चाहिए। खाकी वर्दी पहनते समय उन्होंने जो संकल्प लिया था, क्या वह उस पर खरे उतर रहे हैं?
IPS Y Puran Kumar Case: आईपीएस पर जुल्म
मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना की शिकार महिलाओं के प्रति महाराष्ट्र पुलिस का रवैये क्या इसी प्रकार का है? क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी अपने कर्तव्यों को भूल चुके थे? कानूनी कार्रवाई उन अधिकारियों पर भी होनी चाहिए, जिन्होंने लेडी डॉक्टर की त्वरित मदद करने की बजाए चुप्पी साधे रखी। उन सांसद महोदय से भी सवाल पूछे जाने चाहिए, जिन्होंने फोन पर डॉक्टर को धमकाया था। देश में आधी आबादी के सम्मान एवं सुरक्षा के दावे खूब किए जाते हैं।
ये घटना खामियों को करती है उजागर (Satara Doctor Suicide Case)
केंद्र एवं राज्य सरकारें समय-समय पर विभिन्न अभियान चलाकर नारी शक्ति का गुणगान करती हैं। नारी सशक्तिकरण की खामिर ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियान प्रतिवर्ष देखने को मिलते हैं, मगर महाराष्ट्र जैसी घटनाएं सिस्टम में व्याप्त खामियों को उजागर करती रहती हैं। महाराष्ट्र सरकार को इस मामले की गंभीरता से जांच कराकर दोषियों को न्याय के कटघरे में जल्द से जल्द पहुंचाने की कोशिश करनी होगी। कोलकाता के निजी मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से बलात्कार के बाद हत्या के मामले को आज तक भुलाया नहीं जा सका है।
एक दरिंदे ने अस्पताल की सुरक्षा को धत्ता बताकर कैसे एक नवोदित डॉक्टर को मौत के घाट उतार दिया था। देश के अलग-अलग हिस्सों में आए दिन महिलाओं संग गंभीर अपराध होते रहते हैं। सिर्फ कानून को अधिक प्रभावी बनाने से इस प्रकार के अपराधों पर अंकुश लगना संभव नहीं है। महिलाओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक तथा ताकतवर बनाने की भी आवश्यकता है। विषम परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करने के लिए उन्हें मानसिक तौर पर मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार कोई ऐसा कदम उठाएगी ताकि महाराष्ट्र की धरती पर फिर कोई लेडी डॉक्टर हताशा व निराशा में आकर अपनी जिंदगी से हाथ नहीं धो सकेगी।



