सधराभारी नहर पुल पर शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत, राहगीरों को पिलाया गया शरबत

बल्दीराय/सुल्तानपुर। इस्लामी नए साल 1448 हिजरी के आगाज़ और माह-ए-मोहर्रम की आमद के मौके पर बल्दीराय तहसील क्षेत्र के ग्राम सधराभारी स्थित बड़ी नहर पुल के पास रविवार को सबील-ए-हुसैनी (शरबत वितरण) का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर राहगीरों, मुसाफिरों एवं क्षेत्रवासियों को ठंडा शरबत पिलाकर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला की अज़ीम कुर्बानियों को याद किया गया।

मोहर्रम का महीना हमें सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर डटे रहने का संदेश देता है। कर्बला की सरज़मीं पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों ने जो बेमिसाल कुर्बानी पेश की, वह पूरी इंसानियत के लिए एक रौशन मिसाल है। इसी पैगाम को आम करने के लिए सबील-ए-हुसैनी का आयोजन किया गया, जहां लोगों को शरबत पिलाकर मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत की खिदमत का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मो अहमद, मो आरिफ, रफीक अहमद खान, फिरोज अहमद, तौफीक अहमद, तबरेज अंसारी, रिजवान खान, आवेश खान सहित क्षेत्र के कई युवाओं और समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने पूरी लगन और खिदमत के जज़्बे के साथ व्यवस्थाओं को संभाला, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

आयोजकों ने इस अवसर पर मुल्क में अमन-ओ-अमान, खुशहाली, भाईचारे और इंसानियत की सरबलंदी के लिए विशेष दुआ की है।कार्यक्रम के समापन पर शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए उनके बताए हुए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया। कर्बला हमें यह सबक देती है कि हक़ और इंसाफ के लिए हर कुर्बानी छोटी है। मोहर्रम का पैगाम इंसानियत, सब्र और भाईचारे को मजबूत करना है।इस अवसर पर जमीर अहमद, मो सोहेल, जुनैद, फूल बाबू, समीर, मो तालिब अब्दुल रहमान, सुल्तान, आदि लोग शामिल रहे।

Related Articles

Back to top button