हैलो- मैं CBI/पुलिस से बोल रहा हूं, 3000 करोड़ की ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

हैलो- मैं सीबीआई से बोल रहा हूं…। हैलो! मैं कस्टम विभाग से बात कर रहा हूं…। हैलो! मैं मुंबई पुलिस डिपार्टमेंट से बोल रहा हूं…। डिजिटल अरेस्ट के प्रत्येक केस में साइबर अपराधी अपने जाल में शिकार को फंसाने के लिए इसी अंदाज में बातें करते हैं। फोन पर पीड़ित को डरा-धमका कर मोटी रकम ऐंठने का यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है।
देश के विभिन्न हिस्सों में डिजिटल अरेस्ट के सनसनीखेज मामले प्रकाश में आ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मसले पर चिंता प्रकट कर नागरिकों से सचेत रहने की अपील कर चुके हैं, मगर साइबर अपराधियों पर प्रभावी तरीके से शिकंजा कसने में सफलता न मिलना चिंताजनक है।
अब तक हो चुकी है तीन हजार करोड़ की धोखाधड़ी
बता दें कि देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अनुमानित तीन हजार करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी हो चुकी है। मेहनत की गाढ़ी कमाई एक झटके में हाथ से चले जाने की वजह से कुछ नागरिक जान तक गंवा बैठे हैं। कई पीड़ित डिप्रेशन में चले गए हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा डिजिटल अरेस्ट के खेल पर चिंता जाहिर कर सीबीआई को इन प्रकरणों की जांच प्राथमिकता पर करने के निर्देश देना स्वागत योग्य है।
सीनियर सिटीजन हो रहे हैं सबसे ज्यादा शिकार
डिजिटल अरेस्ट का ज्यादातर शिकार वह सीनियर सिटीजन बने हैं, जिन्हें ऑनलाइन लेन-देन की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। पिछले कुछ साल में डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध के सबसे कुटिल रूप में बनकर उभरी है। यह अपराध न सिर्फ देश की वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए बल्कि कानून प्रवर्तन तंत्र में जनता के भरोसे के लिए भी बड़ा खतरा है।
हरियाणा में वृद्ध दंपति से एक करोड़ रुपए की ठगी के बाद देश की शीर्ष अदालत ने इस व्यापक समस्या का स्वत: संज्ञान लिया। दंपति को धमकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश का इस्तेमाल किया गया। यह चिंताजनक स्थिति है कि साइबर अपराधी सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति नागरिकों के विश्वास को खतरे में डाल रहे हैं। तभी शीर्ष अदालत ने महसूस किया कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा है।
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अलबत्ता सीबीआई को इस मामले की तहत तक जल्द से जल्द पहुंचना चाहिए। यह भी जरूरी है कि जांच एजेंसी की कार्रवाई में लालफीताशाही और राजनीतिक दखल न हो। इसके अलावा नागरिकों को भी ऐसे अपराधों के प्रति सजग रहना होगा। जागरूकता-सतर्कता उन्हें अपराधियों के चंगुल में फंसने से बचा सकती है। ऐसी किसी कॉल के आने पर उन्हें रुककर विचार करना चाहिए और हड़बड़ी में बैंक से जुड़ी कोई जानकारी देने से बचना चाहिए। विदेश में बैठकर साइबर अपराधी इस प्रकार के अपराधों को अंजाम देकर आसानी से बच जाते हैं।
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भारत में कोरोना काल के बाद से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिला है। वर्तमान में स्ट्रीट वेंडर्स से लेकर बड़े दुकानदार तक इसका लाभ उठा रहे हैं। डिजिटल लेन-देन ने ग्राहक और दुकानदार को बड़ी राहत प्रदान की है। डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की देशव्यापी जांच सीबीआई को सौंपने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय समय के अनुरूप सार्थक हस्तक्षेप है। इसी क्रम में कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में अपराधों की जांच के लिए सीबीआई को सहमति दें। निश्चित रूप से सीबीआई के हाथों में जांच आने से साइबर अपराधियों पर नकेल कसने में बड़ी कामयाबी मिलने की उम्मीद है।



