गोकशी और फर्जी केस; कोर्ट में बुरी फंसी यूपी सरकार, अधिकारी तलब

Gau Hatya Kanoon: बेकसूरों को फंसाने और भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार डालने के बढ़ते मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाई है।

Gau Hatya Kanoon: गोकशी के नाम पर बेकसूरों को फंसाया जा रहा है। यह आरोप है जो योगी सरकार पर लग रहे हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अल्टीमेटम दे दिया है। दरअसल आए दिन गोकशी करने के शक पर कई बेकसूरों को भीड़ पीट-पीट कर मार डाल रही है और बाद में पता चलता है कि वह शख्स निर्दोष था। अब जरा सोचिए एक शख्स को मौत दे दी गई बिना किसी दोष के, बिना किसी सुनवाई के, बिना किसी सबूत के।

अभी हाल ही की घटना है। 27 अगस्त को गौ मांस के शक में एक मुस्लिम युवक की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी और अब इस मामले में रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें बीफ की पुष्टि नहीं हो पाई है और वो शख्स निर्दोष निकला। मगर वो शख्स अब इस दुनिया में है ही नहीं। गोकशी के शक पर ऐसे ही तमाम एफआईआर दर्ज की जा रही हैं।

आपको बता दें कि गौ हत्या करने पर कड़ी सजा देने के प्रावधान तय किए गए हैं। मगर आरोप है कि गौ संरक्षण अधिनियम का गलत इस्तेमाल करके गौ रक्षा दल की गुंडागर्दी बढ़ती जा रही है और बेगुनाहों को सजा भुगतनी पड़ रही है। ऐसे बढ़ते मामलों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाई है।

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दरअसल न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति अवधदेश कुमार चौधरी की पीठ ने प्रतापगढ़ निवासी राहुल यादव की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए योगी सरकार को आड़े हाथों लिया है। दरअसल राहुल यादव ने अपनी दलील में बताया उनका ड्राइवर गाड़ी लेकर वापस नहीं लौटा और बाद में उन्हें पता चला कि गाड़ी को नौ गौवंशों के साथ जब्त कर लिया गया है। इस अपराध में उनकी कोई भूमिका नहीं है। मगर पुलिस उन्हें परेशान कर रही है।

राहुल यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उन पर पुलिस ने आरोप लगाए कि राहुल गौवंश को वध के लिए ले जा रहे थे। इसी एफआईआर को खारिज करने के लिए राहुल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अब बड़ा फैसला आया है। फैसले में योगी सरकार पर ही जजों का गुस्सा फूटा है और उन्होंने कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिर्फ शक के आधार पर फर्जी एफआईआर और मॉब लिंचिंग को लेकर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। लगातार फर्जी एफआईआर दर्ज की जा रही है।

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अदालत ने राहुल यादव पर लगे आरोपों पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोर्ट अपनी आंखें नहीं बंद कर सकता है। जज ने कहा कि जिन पशुओं की हत्या के लिए राहुल पर एफआईआर दर्ज हुई है, दरअसल वह जिंदा हैं। अदालत ने कहा कि अब पशु जीवित पाए गए हैं और ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है।

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एफआईआर से स्पष्ट होता है कि पशु जीवित ही पाए गए हैं और उनके राज्य के बाहर ले जाने का कोई आरोप नहीं था। गौ संरक्षण कानून की धारा पांच ए केवल अंतर राज्य परिवहन के मामलों पर लागू होती है। इसी तरह किसी भी तरह के वध या अपंगता का आरोप नहीं था। इसलिए धारा तीन और आठ लागू नहीं होती। क्योंकि याचिकाकर्ता ना तो वाहन चला रहा था और ना ही वाहन में मौजूद था इसलिए प्रारंभिक दृष्टि में पशु क्रूरता अधिनियम के प्रावधान उस पर लागू नहीं होते।

इतना ही नहीं इस पूरे प्रकरण पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और होम सेक्रेटरी को पर्सनल हलफनामा दाखिल करने के निर्देश देते हुए कहा अगर नवंबर तक पर्सनल हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो दोनों को कोर्ट में तलब किया जा सकता है। यानी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह सख्त रवैया अपनाया है। गौ हत्या के नाम पर और शक पर लोगों को पीटा जा रहा है। गौ रक्षक अपनी गुंडागर्दी कर रहे हैं और बेकसूरों को मारा जा रहा है और बाद में पता चलता है कि यह बेकसूर थे और अब शख्स इस दुनिया में ही नहीं रहे।

ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं और अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह संज्ञान लिया है और यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए उनके आधीन काम करने वाले अधिकारियों को हलफनामा जारी करने के निर्देश दिए हैं।

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