भामा शाह विद्यालय की कमान 11 सदस्यीय समिति के हाथ

सुजीत कुमार मऊ
मऊ। भामा शाह विद्यालय समिति मऊ की प्रबंधन समिति एवं विशेष आमंत्रित सदस्यों की बैठक 19 अगस्त 2026 को विद्यालय के प्रधानाचार्य कक्ष में आयोजित हुई। बैठक में सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज मंडल आजमगढ़ के आदेश के तहत 2 मई एवं 25 मई को जारी प्रबंधन समिति की सूची को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बाहरी व्यक्ति राम बड़ाई प्रसाद द्वारा स्वयं को प्रबंधक बताते हुए समिति के संबंध में गलत दस्तावेज और कूटरचित अभिलेख तैयार कराए गए हैं। सदस्यों का कहना है कि इससे विद्यालय के संचालन और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी है।
बैठक में बताया गया कि भामा शाह विद्यालय समिति के अध्यक्ष डॉ. रंजीत, उपाध्यक्ष विजय कुमार एडवोकेट, प्रबंधक लल्लन प्रसाद, उपप्रबंधक राजीव कुमार, कोषाध्यक्ष हरेराम गुप्ता सहित कुल 11 सदस्यीय समिति अब भामा शाह विद्यालय प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के कार्यों की देखरेख करेगी। समिति के सदस्यों के अनुसार जिला विद्यालय निरीक्षक, मऊ कार्यालय में प्रबंधक लल्लन प्रसाद के हस्ताक्षर को लेकर प्रमाणिकता संबंधी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिसके कारण विद्यालय के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सदस्यों ने कहा कि पूर्व में आईजीआरएस के माध्यम से भी इस संबंध में शिकायत की गई थी।
उनका कहना है कि 16 जुलाई 2023 को सब रजिस्ट्रार कार्यालय, आजमगढ़ के आधार पर विधिवत चुनाव कराया गया था और समिति का कार्यकाल पांच वर्ष का है। ऐसे में वर्तमान कार्यकाल के दौरान दोबारा चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं है। बैठक में यह भी दावा किया गया कि 22 जुलाई 2023 को राम बड़ाई प्रसाद के हस्ताक्षर को निरस्त किया जा चुका है।
समिति ने विद्यालय के सुचारु संचालन के लिए वर्तमान प्रबंधक लल्लन प्रसाद के हस्ताक्षर प्रमाणित किए जाने को आवश्यक बताया।इसके अलावा समिति की ओर से आरोप लगाया गया कि पूर्व में लगभग 50 हजार रुपये की लागत से मंगाई गई भामा शाह की मूर्ति विद्यालय परिसर से राम बड़ाई प्रसाद द्वारा गायब कर दी गई। समिति के सदस्यों ने पूरे मामले की जांच कराकर विद्यालय की संपत्ति और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। बैठक में सदस्यों ने कहा कि विद्यालय से जुड़े अभिलेखों और प्रबंध समिति को लेकर उत्पन्न विवाद का शीघ्र निस्तारण होना जरूरी है, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य बिना किसी बाधा के संचालित हो सके।



