UP Rajya Sabha Election: 10 सीटें और 12 उम्मीदवार! 2027 से पहले लखनऊ में किसका होगा ‘खेला’?

UP Assembly Election 2027 से पहले राज्य की राजनीति में Rajya Sabha चुनाव ने नया मोड़ ले लिया है। प्रदेश की 10 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में सत्तारूढ़ BJP और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP), दोनों अपनी ताकत से एक सीट ज्यादा जीतने की कोशिश में हैं। इसी वजह से मुकाबला दिलचस्प हो गया है और तोड़-फोड़ की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं।

अखिलेश यादव का तीसरे उम्मीदवार पर दांव

संख्याबल के हिसाब से सपा को दो सीटें मिलती दिख रही हैं। इसके बावजूद पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav तीसरा प्रत्याशी उतारने का मन बना चुके हैं। उनका दावा है कि NDA खेमे के कुछ MLA उनके उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने को तैयार हैं। यानी सपा की रणनीति का आधार cross-voting की उम्मीद है।

BJP का जवाबी प्लान: 9वां कैंडिडेट

सपा की इस चाल का जवाब देने के लिए BJP भी पीछे नहीं हटने वाली। पार्टी 8 की जगह 9 उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है। अगर दोनों दल अपने-अपने प्लान पर आगे बढ़ते हैं, तो 10 सीटों के लिए कुल 12 candidates के बीच मुकाबला होगा।

BJP का कहना है कि 8 प्रत्याशियों को जिताने के बाद भी उसके पास जरूरी वोटों से ऊपर अतिरिक्त समर्थन बचा रहेगा। इसी भरोसे पर पार्टी नौवीं सीट पर भी नजर गड़ाए है।

समझिए Rajya Sabha का पूरा गणित

अब सीधे आंकड़ों पर आते हैं:

  • एक सीट जीतने के लिए करीब 36 वोट की जरूरत है।
  • 8 सीटों के लिए BJP को चाहिए: 36 × 8 = 288 वोट।
  • BJP के अपने MLA की संख्या 259 है।
  • सहयोगी दलों को मिलाकर NDA का आंकड़ा 299 तक पहुंचता है।
  • इस तरह 288 वोट पूरे करने के बाद भी NDA के पास 11 अतिरिक्त वोट बचते हैं।

इस गणित के दो मायने

पहला: अगर BJP को अपने सहयोगी दलों के वोटों पर पूरा भरोसा है, तो वह 9वीं सीट के लिए सपा खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती है।

दूसरा: सिर्फ अपने 259 विधायकों के दम पर पार्टी की 7 सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं, लेकिन 8वीं सीट के लिए उसे सहयोगियों या अन्य विधायकों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा।

क्या सपा के MLA सच में BJP के संपर्क में हैं?

BJP के सूत्रों का दावा है कि सपा के कई विधायक पार्टी नेतृत्व से बातचीत कर रहे हैं। Deputy CM Keshav Prasad Maurya ने भी कहा है कि सपा के कुछ MLA उनके संपर्क में हैं। हालांकि अभी तक इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अखिलेश के बिना सब सूना, बृजभूषण के बयान के बाद यूपी की सियासत में नया मोड़

ऐसे में nomination से लेकर voting के दिन तक दोनों दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ दूसरे खेमे पर भी पैनी नजर बनाए रखेंगे। आने वाले दिनों में यूपी की सियासत में और उठापटक देखने को मिल सकती है।

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