मनोज राय बोले- चुनावी प्रक्रिया पर सवाल हों तो तथ्यों के साथ रखें अपनी बात

मऊ। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच मऊ जिला पंचायत अध्यक्ष मनोज राय ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन बात तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। मनोज राय ने कहा कि निर्वाचन आयोग देश में चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था है। ऐसे में आयोग के किसी फैसले पर सवाल उठाने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी सामने रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी बात जनता के बीच रखते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी बयान से लोगों के बीच बेवजह भ्रम की स्थिति न बने।
SIR को लेकर उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से इस प्रक्रिया के संबंध में स्पष्टीकरण दिया गया है। उनके मुताबिक मतदाता सूची को दुरुस्त करने और उसमें पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज रखने के उद्देश्य से पुनरीक्षण की प्रक्रिया की जाती है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं और मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने बिहार में हुए SIR का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले में बिहार में किए गए SIR को वैध माना गया। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग को कानून के तहत मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का अधिकार है और इस प्रक्रिया में निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किया गया था।
मनोज राय ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 की व्यवस्था है। आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल के जरिए पात्र नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया या निर्वाचन आयोग के फैसले को लेकर किसी राजनीतिक दल को आपत्ति है तो वह अपनी बात आयोग के सामने रख सकता है। जरूरत पड़ने पर न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में संस्थाओं के फैसलों पर चर्चा और समीक्षा की गुंजाइश रहती है, लेकिन आरोपों के साथ ठोस तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए।
मनोज राय ने कहा कि ईवीएम, मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर लगातार बयानबाजी से आम मतदाता के बीच सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी मतदाता का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा भी है। इसलिए सभी पक्षों को ऐसे मुद्दों पर तथ्यों के साथ चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित किसी भी शिकायत का समाधान निर्धारित कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था के तहत किया जाना चाहिए



